महान पुरातत्वविद डा. बी. बी. लाल की पुस्तकें पढ़ता हूं तो अपने समय की अनेक वस्तुएं चार–पांच हजार साल पहले से जुड़ी नजर आती हैं। मोहनजोदड़ो काल की महिला की मांग का सिंदूर, बच्चों के खिलौने, दर्पण में निहारती स्त्री, गंधार काल की सुंदरी का केश-विन्यास और कंकही — सब तब भी थे और आजContinue reading “कंकही का भविष्य”
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गांव भर का हाल
कुल बीस मिनट लगते हैं उसे मेरे जोड़ों की मालिश करने में। इस दौरान मैं सामान्यत: टैब पर कोई लेख या अख़बार का सम्पादकीय सुनता रहता हूं। आज टैब पास नहीं था और वह आ गया। मेरे पास समय था और उसके हाथ, यद्यपि व्यस्त थे, पर बात-चीत तो वह कर ही सकता था। मैंनेContinue reading “गांव भर का हाल”
अगियाबीर की कंकही
मेरे सामने कंघी के साथ कंकही पड़ी है। कंकही वह साधारण उपकरण है जो बालों से जुएं निकालने के काम आता है। मानव इतिहास में शायद ही कोई समाज रहा हो जहां जुएं न रही हों। जहां जुएं रहीं, वहां उन्हें निकालने के उपाय भी विकसित हुए। तेल लगे बालों को फैलाना और कंकही सेContinue reading “अगियाबीर की कंकही “
