रैट रेस में अपने को पेरते लोग — क्या बंधुआ मजदूर हैं? मैं साइकिल ले कर ईंट भट्ठा वाले मजदूरों को देखता हूं और स्लिंग बैग लिये बम्बई की सबर्बन ट्रेन में बैठे मोबाइल पर फेसबुक स्क्रॉल करते या ट्रेन के गेट पर रील बनाते नौजवान की कल्पना करता हूं। कौन बंधुआ मजदूर है औरContinue reading “बंधुआ मजदूरी का आधुनिक रूप “
Category Archives: Village Diary
कंकही का भविष्य
महान पुरातत्वविद डा. बी. बी. लाल की पुस्तकें पढ़ता हूं तो अपने समय की अनेक वस्तुएं चार–पांच हजार साल पहले से जुड़ी नजर आती हैं। मोहनजोदड़ो काल की महिला की मांग का सिंदूर, बच्चों के खिलौने, दर्पण में निहारती स्त्री, गंधार काल की सुंदरी का केश-विन्यास और कंकही — सब तब भी थे और आजContinue reading “कंकही का भविष्य”
गांव भर का हाल
कुल बीस मिनट लगते हैं उसे मेरे जोड़ों की मालिश करने में। इस दौरान मैं सामान्यत: टैब पर कोई लेख या अख़बार का सम्पादकीय सुनता रहता हूं। आज टैब पास नहीं था और वह आ गया। मेरे पास समय था और उसके हाथ, यद्यपि व्यस्त थे, पर बात-चीत तो वह कर ही सकता था। मैंनेContinue reading “गांव भर का हाल”
