घर के सामने की दांये कोने पर कम ही जाता हूं। वहां गूलर, नीम और पीपल के तीन पेड़ हैं। त्रिदेव की तरह। वहां रामसेवक घर की किचन गार्डनिंग करते हैं। एक कोने में दुमुही – सैंडबोआ और धामिन – असाढ़िया चूहे खाने वाले सांप की भी उपस्थिति है। कभी कभी तीतर भी अपना परिवारContinue reading “घर के बगीचे के कोने की दुनियाँ”
Category Archives: Village Life
दो साइकिलों की कहानी
बटोही ने पहले गाँव-देहात दिखाया। दस किलोमीटर की परिधि में — शरबतखानी से जगतानंद धाम, पचेवरा से गिर्दबड़गांव — सब उसके साथ नापा। वह अब भी नाप सकती है। पर मेरे घुटने अब उतनी मेहनत की इजाज़त नहीं देते। इसीलिये ईबटोही आई। बटोही अब दूसरे रोल में है। रोज़ चालीस-साठ मिनट घर-परिसर में गोल-गोल चक्कर।Continue reading “दो साइकिलों की कहानी”
धनरा भुंजईन की भरसायँ
दूध लेते जाते मैं रोज वह पत्तियों का ढेर और भरसायँ देखता था। भरसायँ यानी मिट्टी का वह गोलाकार चूल्हा जिसमें दाना — चना, मक्का — भूना जाता है। गाँव में अभी भी दिख जाती है सड़क किनारे। मुझे रोज यह भी नजर आता है कि पत्तियों का जखीरा बढ़ रहा है। पर दाना भूननेContinue reading “धनरा भुंजईन की भरसायँ “
