घर के बगीचे के कोने की दुनियाँ

corner in garden

घर के सामने की दांये कोने पर कम ही जाता हूं। वहां गूलर, नीम और पीपल के तीन पेड़ हैं। त्रिदेव की तरह। वहां रामसेवक घर की किचन गार्डनिंग करते हैं। एक कोने में दुमुही – सैंडबोआ और धामिन – असाढ़िया चूहे खाने वाले सांप की भी उपस्थिति है। कभी कभी तीतर भी अपना परिवार बनाता है उधर।

आज उस ओर गया। पत्नीजी साथ थीं — उन्होंने एक-एक पौधे का परिचय कराया, जैसे किसी पुराने मोहल्ले में घर की बुजुर्ग मालकिन पड़ोसियों को कराती हैं। बोड़ा-बजरबट्टू की हरी भरी बेल फैल गई है, सफेद-बैंगनी फूलों के साथ। तीस-चालीस सूरजमुखी के पौधे हैं — कंधे तक ऊँचे — और सभी मुँह पूरब की ओर किये हैं, सूरज की तरफ।

बाद में, चित्र में देखा तो पीछे त्रिदेव भी खड़े थे — सूरजमुखी के साक्षी।

गाजर और धनिया अब फूल-फल-बीज तक पहुँच गये हैं — अपना पूरा जीवनक्रम चुपचाप पूरा करते हुए।
लेमन ग्रास तो खूब छंछड़ा है। रामसेवक की कैंची ने लगता है उसे संवार दिया है — आकर्षित करता है। दो दिन पहले आनंद और राजकुमारी आये थे — राजकुमारी उसके चित्र ले गईं। कलकत्ता में शायद उनके यहां है नहीं लेमन ग्रास।

घरपरिसर का हर एक कोना अपना अपना दुख-सुख लिये मौन जी रहा है। शायद सोचता भी हो कि इस घर का खूसट बुढ़ऊ मालिक उनके आसपास क्यों नहीं आता।

आज सोचा — रोज सवेरे दस मिनट वहाँ जाना चाहिये। उनसे संवाद करना चाहिये।

Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

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