ईंटवा का गंगा तट


लगता है ये मछलियां गंगा के जल में बह कर आगे नहीं निकल जातींं। यहीं रहती हैं। गंगा किनारे की मछलियां। मैं सोचता था कि जो जल में है सब बहता है। सब यात्रा पर है। पर वैसा नहीं है। कुछ जलचर भी एक ही जगह रहते हैं।

तिरंगा और जलेबी


मेरी जलेबी ठण्डी न हो जाये, इसलिये घर पंहुचने की जल्दी थी। अन्यथा इस राष्टीयता के बाजर की चहल पहल को और इत्मीनान से देखता।

आम खतम हुये, लग्गियाँ उपेक्षित हो गयीं


अगले साल नये आम होंगे, अशोक नई लग्गियां बनायेगा। अभी तो ये सभी उपेक्षित हो गयी हैं। गौतमस्थान की अहिल्या की तरह। प्रतीक्षा करतीं कि कोई आम आयेंगे और उनका उद्धार करेंगे!

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