स्क्रॉलिंग ब्लॉगरोल – गूगल रीडर से



मैं आपको गूगल रीडर से स्क्रॉल करता ब्लॉगरोल बनाना बताता हूं। ऐसा ब्लॉगरोल मैने अपने ब्लॉग पर लगा रखा है। जिसे देख कर आप में से कुछ लोगों ने उसकी जुगाड़ तकनीक की बात की है। 

गूगल रीडर पर आप अपना अकाउण्ट यहां पर जा कर खोल सकते हैं। पेज ऐसा दिखता है। इसके लिये आपके पास गूगल आइडी होनी चाहिये। 

Reader1

अकाउण्ट खोलने पर आप अपने पसन्द के फ़ीड – ब्लॉग या न्यूज या अन्य प्रकार के – आप गूगल रीडर पर लोड कर सकते हैं। आप नीचे तीर से दर्शाये डिब्बे में फ़ीड एड्रेस भर कर ऐसा कर सकते हैं।

Reader2

फ़ीड लोड होने पर पीली पट्टी (नीचे) में आप को सुविधा होती है कि उस ब्लॉग या अन्य फ़ीड को आप एक फोल्डर/टैग में संजो सकें। मैने अपने ब्लॉग hindi-blogs के फोल्डर/टैग में रखे हैं। 

Reader3

अगर आप एक नया फोल्डर बना कर उसमें नयी फ़ीड रखना चाहें तो वह भी सम्भव है। नीचे तीर पर उपलब्ध विकल्प देखें।

Reader4 

जब आप अपने मन के ब्लॉग एक फोल्डर (मैने hindi-blogs में रखे हैं) में रख लें तो उसका ब्लॉग रोल बनाने के लिये manage your subscriptions में जा कर उस फोल्डर/टैग को पब्लिक कर दें। पब्लिक करने पर आपको add blogroll to your site का विकल्प मिल जायेगा (आप नीचे तीर देखे। मेरा hindi-blogs पब्लिक फोल्डर है और उसमें यह विकल्प दिख रहा है।)। अपने उस पब्लिक फोल्डर जिसका ब्लॉग रोल बनाना है, का add blogroll to your site विकल्प क्लिक कर दें।

Reader5

क्लिक करने पर आपको एक पॉप अप विण्डो में नीचे वाला चित्र मिलेगा। इसमें आप ब्लॉगरोल का टाइटल और उसका रंग प्रिव्यू दायीं ओर देखते हुये चुन लें। नीचे के तीर में दर्शाया HTML Snippet  संजो लें।

Reader6 

अब आपको अपने उक्त HTML Snippet से एक स्क्रॉल करने वाला HTML Snippet जेनरेट करना है। मेरे hindi-blogs का यह स्क्रॉल करने वाला HTML Snippet निम्न है।

Gyan Blogroll

इसमें पीला वाला अंश स्क्रॉल करने के लिये है और सफ़ेद अंश मेरे गूगल रीडर द्वारा मेरे ब्लॉगरोल का बनाया स्निपेट है। इसमें लाल आयतों में जो ऊंचाई (height) और चौड़ाई (width) के px हैं, को बदल कर ब्लॉगरोल का आकार बदला जा सकता है।

ऊपर दर्शाये सफेद अंश के इस HTML Snippet को आप अपने गूगल स्निपेट से बदलें। पर ऊपर वाले चित्र से आपको HTML Snippet कॉपी करने में दिक्कत होगी। अत: आप इस लिंक से इसे Gyan Blogroll.txt फाइल के रूप में डाउनलोड कर नोटपैड पर रख लें| Gyan Blogroll.txt का डाउनलोड नोटपैड में ऐसा होगा:

General Blogroll 

इसमें नीले आयत में दिखने वाले AAAAAAAAAAAA को अपने गूगल रीडर के HTML Snippet से रिप्लेस कर लें।

अब आप अपना स्क्रॉल करने वाला स्निपेट तैयार है। उसे आप अपने ब्लॉग ले-आउट में HTML/Javascript पेज एलीमेण्ट के रूप में अपनी मनपसंद जगह पर चिपका दें। अपने ब्लॉग पेज का अवलोकन कर लें कि सब सही चल रहा है या नहीं। मैने यह ब्लॉगस्पॉट पर कर रखा है। वर्डप्रेस या अन्य पर प्रयोग आप करें!

यह मैने फर्राटे से लिखा है। जिसे समझने-करने में आपको जद्दोजहद करनी होगी। (पर फिक्र न करें – सर्दियों में सिर खुजाने से बालों की रूसी ही दूर होगी!) 

मेरे ख्याल से अगर आप को जुगाड़ तकनीक का कुछ रस मिलता हो तो यह स्क्रॉल करता ब्लॉग रोल बन जाना चाहिये। मेरे लिये भी HTML अनजान और विदेशी भाषा है; पर उसे यहां-वहां से जुगाड़ तकनीक से फिट किया है।    


और हां, कल दुकान बंद रहेगी।Smile


पर्यावरण के मुद्दे ॥ नीलगाय अभी भी है शहर में



Gyan(265)

टेराग्रीन (Terragreen) पत्रिका का नया अंक »

इस वर्ष इण्टरगवर्नमेण्टल पेनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) और अल-गोर को संयुक्त रूप से नोबल शांति पुरस्कार दिये जाने के कारण पर्यावरण का मुद्दा लाइमलाइट में आ गया है।  कल मैने टेराग्रीन (Terragreen) नामक मैगजीन का एक अंक ४० रुपये खर्च कर खरीद लिया। यह पत्रिका श्री आर.के पचौरी सम्पादित करते है। श्री पचौरी आइ.पी.सी.सी.के चेयरपर्सन भी हैं- और उनके संस्थान को नोबल पुरस्कार मिलने पर भारत में निश्चय ही हर्ष का माहौल है। मेरे ख्याल से टेराग्रीन का यह अंक अखबार की दुकान पर इसी माहौल के चलते दिखा भी होगा – यद्यपि यह पत्रिका अपने पांचवे वर्ष के प्रकाशन में है। पत्रिका के दिसम्बर-जनवरी के इस अंक में श्री पचौरी का एक साक्षात्कार भी छपा है।

इस अंक में एक लेख भोजन में एडिटिव्स पर भी है। और वह मुझे काफ़ी क्षुब्ध/व्यथित करता है। जिन तत्वों की बात हो रही है, उनका मैं पर्याप्त प्रयोग करता हूं। यह टेबल उनका विवरण देगी: 

खाद्य पदार्थ रसायन खतरे
अप्राकृतिक स्वीटनर (ईक्वल, सुगर-फ्री) जिनका मैं बहुत प्रयोग करता हूं – कैलोरी कम रखने के चक्कर में। एसपार्टेम फीनाइल्केटोन्यूरिया और मानसिक क्षमता में कमी (Phenylketoneuria and mental retardation)
चिकन बर्गर मोनो सोडियम ग्लूटामेट या अजीनोमोटो अस्थमा, ग्लाकोमा औए डायबिटीज
सॉसेज और फास्ट फ़ूड (नूडल्स आदि) मोनो सोडियम ग्लूटामेट या अजीनोमोटो अस्थमा, ग्लाकोमा औए डायबिटीज
केचप सेलीसिलेट्स (salicylates) जिंक की कमी वाले लोगों में श्रवण शक्ति का क्षरण
जैम सेलीसिलेट्स (salicylates) जिंक की कमी वाले लोगों में श्रवण शक्ति का क्षरण
मिण्ट फ्लेवर्ड च्यूइंग-गम और माउथ फ्रेशनर   सेलीसिलेट्स (salicylates) जिंक की कमी वाले लोगों में श्रवण शक्ति का क्षरण
मुझे तो सबसे ज्यादा फिक्र आर्टीफीशियल स्वीटनर की है। इसका प्रयोग बीच बीच में वजन कम करने का जोश आने पर काफी समय तक करता रहा हूं। टेराग्रीन की सुनें तो इससे मानसिक हलचल ही कुंद हो जायेगी!
पर क्या खाया जाये मित्र? चीनी बेकार, नमक बेकार, वसा बेकार। ज्यादा उत्पादन के लिये प्रयुक्त खाद और कीटनाशकों के चलते अन्न जहरीला। दूध मिलावटी। दवाओं और एडिटिव्स के भीषण साइड इफेक्ट्स!
टेराग्रीन जैसी पत्रिकायें किसी को तो नोबेल पुरस्कार दिलाती हैं और किसी को वातावरण में जहर घुला होने का अवसाद बांटती हैं।Confused
अगला अंक मैं खरीदने वाला नहीं!

शहर में नीलगाय

नील गाय की चर्चा पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है।

अपनी ब्लॉगरी की शुरुआत में मैने मार्च’२००७ में एक पोस्ट लिखी थी – शहर में रहती है नीलगाय। मेरे घर के पास नारायण आश्रम की हरित पट्टी में आश्रम वालों ने गाये पाली हैं। उनके साथ एक नीलगाय दिखी थी इस वर्ष मार्च के महीने में। वह कुछ समय तक दिखती रही थी पर फिर दिखना बंद हो गया। अब अचानक फ़िर वह पालतू पशुओं से थोड़ी अलग चरती दिखी। मुझे सुकून आया कि वह यहीं है।

neelgai

यह चित्र मोबाइल के कैमरे से उतना साफ नहीं आया है। वह कुछ दूरी पर थी और मौसम भी कुछ साफ कम था।

मैने मार्च में लिखा था कि नीलगायों की संख्या कम हो रही है। पर वह सही नहीं है। दशकों से बाढ़ नहीं आयी है गंगा नदी में और उसके कारण नीलगाय जैसे जंगली पशुओं की संख्या बढ़ रही है जो कछार की जमीन पर उगने वाली वनस्पति पर जिन्दा रहते हैं।

[फोटो देख कर भरतलाल उवाच: अरे मोरि माई, ई त लीलगाय हौ। बहुत चोख-चोख लम्मा लम्मा सींघ हो थ एनकर। पेट में डारि क खड़बड़ाइ देइ त सब मालपानी बहरे आइ जाइ। (अरे मां! यह तो लीलगाय है। बड़े नुकीले और लम्बे सींग होते हैं इनके। किसी के पेट में भोंक कर खड़बड़ा दे तो पेट का सारा माल पानी बाहर आ जाये!) मैने पाया कि ग्रामीण परिवेश का होने के कारण वह अधिक जानता है नीलगाय के बारे में। वह यह भी जानता है कि यदा कदा रेबिड होने – पगलाने पर, नीलगाय किसानों की जिंदगी के लिये भी खतरा बन जाती है। यद्यपि सामान्यत: यह डरपोक प्राणी है।] 


अगर मैं कुछ दिनों में गूगल रीडर के स्क्रॉलिंग ब्लॉगरोल (हाइपर लिंक के पुच्छल्ले का अन्तिम आइटम) पर लिखूं तो मुख्य बात होगी कि आप गूगल रीडर का प्रयोग करते हैं या नहीं अपनी ब्लॉग व अन्य फ़ीड्स पढ़ने के लिये। अगर नहीं करते तो इस ट्यूटोरियल से वीडियो देख कर गूगल रीडर का परिचय प्राप्त करें। (बोलने वाली बड़ी तेज-फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती है। जरा ध्यान से सुनियेगा।Happy)


शहर में भी संयुक्त परिवार बहुत हैं



हम सोचते हैं कि ग्रामीण परिवेश से शहर में पलायन करने पर संयुक्त परिवार टूट जाते हैं। निश्चय ही चार-पांच पीढियों वाले कुटुम्ब तो साथ नहीं रह पाते शहर में – जिनमें १०० लोग एक छत के नीचे रहते हों। पर फिर भी परिवार बिल्कुल नाभिकीय (माता-पिता और एक या दो बच्चे) हो गये हों, ऐसा भी नहीं है।

मैं सवेरे घूमने जाता हूं तो अपनी मध्यवर्गीय/निम्नमध्यवर्गीय कालोनी – शिवकुटी में ढ़ेरों नाम पट्ट ऐसे मिलते हैं, जिनसे पता चलता है कि दो-तीन पीढ़ियां एक साथ रह रही हैं। ऐसे ही कुछ नाम पट्टों के चित्र प्रस्तुत कर रहा हूं।

Gyan(259) Gyan(261)
Gyan(263) Gyan(264)
Gyan(260) शिवकुटी, इलाहाबाद के नाम पट्ट जो बताते हैं कि संयुक्त परिवार रह रहे हैं – एक छत के नीचे। ऐसे और भी बहुत घर हैं। पहला पट्ट (शिव धाम) तो वंश-वृक्ष जैसा लगता है!

सम्भवत: मेट्रो शहरों में नाभिकीय परिवार अधिक हों, पर इलाहाबाद जैसे मझले आकार के और बीमारू प्रदेश के शहर में आर्थिक अनिवार्यता है संयुक्त परिवार के रूप में अस्तित्व बनाये रखना। मुझे लगता है कि तकनीकी विकास के साथ जब रोजगार घर के समीप आने लगेंगे तथा रहन सहन का खर्च बढ़ने लगेगा; तो लोग उत्तरोत्तर संयुक्त परिवारों की तरफ और उन्मुख होंगे।Thinking

क्या विचार है आपका?


गूगल के ऑफीशियल जीमेल ब्लॉग ने 31 अक्तूबर को बताया था कि विश्व मेँ स्पैम बढ़े हैं, पर जीमेल उन्हें उत्तरोत्तर स्पैम फिल्टर में धकेलने में सफल रहा है। स्पैम फ़िल्टरमें तो मुझे रोज ६-१० स्पैम मिलते हैं। औसतन एक को रोज मैं इनबॉक्स से स्पैम में धकेलता रहा हूं। पर कल अचानक स्पैम की इनबॉक्स में आमद बढ़ गयी। कल ६-७ स्पैम मेल इनबॉक्स में मिले। उनपर यकीन करता तो मुझे लाटरी और किसी मरे धनी आदमी की वसीयत से इतना मिलता कि मै‍ तुरन्त नौकरी की चक्की से मुक्त हो जाता। बिजनेस पार्टनर बनाने के लिये भी एक दो प्रस्ताव थे – जैसे मुझे बिजनेस का अनुभव हो!

Spam

कल आप सभी ’लक-पति (luck-pati)’ रहे या मैं अकेला ही?! Thinking


Design a site like this with WordPress.com
Get started