बुलबुलान बनाम बाभनपट्टी


जनसंख्या की दौड़; ज्यादा बच्चे पैदा करना और अपना घेट्टो बनाना ब्राह्मणत्व का निदान नहीं है! एक कोने में दाना डालो तो बुलबुल आती है। धीरे, झिझकती हुई। दो-चार दाने उठाती है और उड़ जाती है। टिक नहीं पाती वहां।  उससे पहले कौआ आ जाता है। फिर चर्खियाँ। शोर, झपट्टा, कब्ज़ा जमा लेते हैं वे।Continue reading “बुलबुलान बनाम बाभनपट्टी”

आत्माराम तिवारी की अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड में उड़द और गाय की चिंता


अशक्त, कूल्हे की हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन कराए एमरजेंसी वार्ड में लेटे चौरासी वर्षीय पंडित आत्माराम तिवारी का मन गांव देहात, घर, उड़द और गाय में घूम रहा है. उन्हें एक बंधुआ श्रोता चाहिए पर लोग पगहा छुड़ा भागते हैं.

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