मध्यमता (मिडियॉक्रिटी) के युग में उत्कृष्टता की राजनीति


कोई भी व्यवस्था जो सर्वश्रेष्ठ को चुनने में असफल है, वह अंततः सबसे कमजोर को ही धोखा देती है। भारतीय लोकतंत्र पिछले कुछ दशकों से एक अजीब द्वंद्व में फँसा हुआ है। एक ओर अनुपातिक प्रतिनिधित्व की राजनीति है—जिसने ऐतिहासिक अन्यायों को दृश्यता दी, आवाज़ दी और एससी, एसटी, ओबीसी आदि के लिये सत्ता केContinue reading “मध्यमता (मिडियॉक्रिटी) के युग में उत्कृष्टता की राजनीति”

चाय की दुकान वाले दम्पति


दम्पति हर बात में ईश्वर को याद करते और परम सत्ता की नियामत की कृतज्ञता व्यक्त करते दिखे। मैने आमदनी के बारे में पूछा तो जवाब वही मिला – भगवान की कृपा है। सब ठीक से चल जाता है।

टेलीवीजन (या रेडियो) की जरूरत


लम्बे समय से मैने टेलीवीजन देखना बन्द कर रखा है। मैं फिल्म या सीरियल की कमी महसूस नहीं करता। पर कुछ दिन पहले सवेरे जब मैं अपनी मालगाड़ियों की पोजीशन ले रहा था तो मुझे बताया गया कि दादरी के पास लोग ट्रैक पर आ गये हैं और दोनो ओर से ट्रेन यातायात ठप है।Continue reading “टेलीवीजन (या रेडियो) की जरूरत”

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