धंधुका – कांवर यात्रा में पड़ा दूसरा रेल स्टेशन


प्रेमसागर दोपहर दो-तीन बजे धंधुका रेलवे स्टेशन पर आ गये थे। वहां खाली पड़े रेलवे स्टेशन के डॉर्मेट्री वाले रेस्ट हाउस में जिसमे चार बिस्तर हैं; प्रेमसागर को जगह मिली। स्टेशन पर बिजली पानी की सुविधा है। काम लायक फर्नीचर भी है।

माँ की याद आती ही है, आंसू टपकते हैं – प्रेमसागर


जिनके लिये इतना कठिन संकल्प लिया, उनकी याद आती है? – मेरा यह प्रश्न सुन कर प्रेमसागर की आवाज बदल जाती है। लगता है कि कुछ गले में फंस रहा हो – “भईया अकेला चलता हूं तो उनका याद, माँ का याद, बना ही रहता है। …आंसू टपकने लगते हैं।

प्रेमसागर – तारापुर से गलियाना, गुजरात में


रास्ते में लोग उनकी कांवर पदयात्रा देख कर सहायता करने में पीछे नहीं रहे। सवेरे चाय की दुकान पर चाय वाले सज्जन – सीताराम बाबा जी ने बुला कर चाय पिलाई और पैसे नहीं लिये। एक जगह कालू भाई और गिरीश भाई ने उन्हें रोक कर उन्हें चीकू और केले खिलाये। दोपहर में एक होटल में भोजन के लिये रुके और भोजन के बाद होटल वाले सज्जन ने भी इनसे पैसे नहीं लिये।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free