डायरी, घास, निठल्ला मन, राखी और यादोत्सव


घर में बहुत चांव चांव है। मुझे मेरी बहन की आयी राखी बिटिया ने बांधी। बहन की याद आ रही है। उसके बहाने अपनी माँ-पिताजी की भी याद आ रही है। कोई भी त्यौहार क्या होता है, उम्र बढ़ने के साथ वह अतीत का यादोत्सव होने लगता है।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free