घर के बगीचे में


मेरी पत्नीजी के पास इस बागवानी विधा और उसमें पलते जीवजंतुओं के बहुत से अनुभव हैं और बहुत सी कहानियां भी। वे उन्हें ब्लॉग पर प्रस्तुत करें तो छोटे-मोटे रस्किन बॉण्ड जैसा काम हो सकता है। पर पता नहीं उनका यह करने का मन होगा या नहीं। ….

मेरे भाई लोग


आज सवेरे अचानक मेरे तीन भाई (मेरी पत्नी जी के भाई) घर पर आये। वे लोग भदोही से लखनऊ जा रहे थे। रास्ते में यहां पड़ाव पर एक घण्टा रुक गये। इनमें से सबसे बड़े धीरेन्द्र कुमार दुबे बेंगळूरु में प्रबन्धन की एक संस्था से जुड़े हैं। उनसे छोटे शैलेन्द्र दुबे प्रधान हैं। पिछला विधानसभाContinue reading “मेरे भाई लोग”

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