बेंजामिन फ्रेंकलिन और शब्दों की मितव्ययता


सम्भव है आप में से कई लोगों ने बेंजामिन फ्रेंकलिन का जॉन थॉम्प्सन द हैटर वाला किस्सा सुना हो. जहां पर कम शब्दों मे कहने की बात आती है, वहां इसका उल्लेख बड़ा सशक्त हो जाता है. अमेरिकी डिक्लेरेशन ऑफ इण्डिपेंडेंस के ड्राफ्ट पर बहस चल रही थी. थॉमस जैफर्सन के ड्राफ्ट पर लोग बदलावोंContinue reading “बेंजामिन फ्रेंकलिन और शब्दों की मितव्ययता”

आलोक पुराणिक और बोरियत


दो शब्द ले लें जिनमे कुछ भी कॉमन न हो और शीर्षक बना दें. कितना ध्यानाकर्षक शीर्षक बनेगा! वही मैने किया है. आलोक और बोरियत में कोई कॉमनालिटी नहीं है. आलोक पुराणिक को मरघट के दृष्य पर लिखने को दे दें – मेरा पूरा विश्वास है कि वे जो भी अगड़म-बगड़म लिखेंगे उससे आप अपनीContinue reading “आलोक पुराणिक और बोरियत”

अ बिजनेस इज अ बिजनेस – गलत क्या है?


जो शीर्षक दिया है, वह हिन्दी अंग्रेजी घालमेल वाला हो गया है. इतना हिन्दी रखी है कि हिन्दी वाले नाक-भौं न सिकोड़ें. अन्यथा शीर्षक रखने का विचार था – अ बिजनेस इज़ अ बिजनेस इज़ अ बिजनेस – व्हाट्स रॉंग अबाउट इट! यह प्रतिक्रिया दिल्ली में ब्लॉगरों के जमावड़े के बारे में पढ़ कर है.Continue reading “अ बिजनेस इज अ बिजनेस – गलत क्या है?”

प. विष्णुकांत शास्त्री से क्या सीख सकते हैं चिठेरे?


पण्डित विष्णुकांत शास्त्री (1929-2005) को मैं बतौर आर.एस.एस. के सक्रिय सम्बद्ध व्यक्ति, पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष, भाजपा के उपाध्यक्ष अथवा उत्तरप्रदेश/उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में नहीं वरन एक लेखक के रूप में याद कर रहा हूं. और उस रूप में अच्छे ब्लॉगर के लिये एक सबक है – जो मैं बताना चाहता हूं.Continue reading “प. विष्णुकांत शास्त्री से क्या सीख सकते हैं चिठेरे?”

रवि रतलामी, सुन रहे हैं?*


कल रवि रतलामी ने अपने फीड का सैकड़ा पार करने की खबर दी. रवि वह सज्जन हैं जो अकस्मात मुझे नेट पर दिखे थे. मैं रतलामी सेव की रेसिपी गूगल सर्च में खंगाल रहा था और मिल गये रवि रतलामी! उसी के बाद मुझे हिन्दी में नेट पर लिखने की सनक सवार हुई. उनका दफ्तरContinue reading “रवि रतलामी, सुन रहे हैं?*”

इण्डियन एक्स्प्रेस हाजिर हो!!!


अरुण शौरी के जमाने से इण्डियन एक्स्प्रेस मेरा पसन्दीदा अखबार है. मैं 2003-04 में गोरखपुर में था. इण्डियन एक्स्प्रेस एक दिन देर से मिलता था, फिर भी मैने उसे जारी रखा. पर जब एक दिन बाद भी उसकी सप्लाई अटकने लग गयी तो जा कर अपनी लॉयल्टी बदली. अब भी मैं नेट पर इण्डियन एक्स्प्रेसContinue reading “इण्डियन एक्स्प्रेस हाजिर हो!!!”