हिन्दी की वर्जनायें और भरतलाल छाप हिन्दी!


उत्तर-मध्य रेलवे के हिन्दी पखवाड़ा समारोह से आ रहा हूं. पखवाड़ा समारोह माने एक राजभाषा प्रदर्शनी, गायन का कार्यक्रम, भाषण, एक प्लेट (पर्याप्त) अल्पाहार, पनीली कॉफी और पुरस्कार वितरण का समग्र रूप. हर साल की तरह इस साल का कार्यक्रम. मुख्य अतिथि के लिये अशोक वाजपेयी जी को बुलाया गया था. वे लपेट-लपेट कर हिन्दीContinue reading “हिन्दी की वर्जनायें और भरतलाल छाप हिन्दी!”

भ्रष्टाचार खत्म करने के लिये समृद्धि के प्रति सोच बदले


अनिल रघुराज जी का कथन है कि गरीबी खतम होने से ही भ्रष्टाचार खतम होगा. अमीर देशों में भ्रष्टाचार कम है. पर गरीबी खतम करने के मिशन से अमीर देश अमीर बने हैं क्या? मुझे नहीं लगता कि गरीबी कम करना किसी राष्ट्र का सार्थक मिशन हो सकता है. वह तो श्रीमती गांधी का देशContinue reading “भ्रष्टाचार खत्म करने के लिये समृद्धि के प्रति सोच बदले”

सड़क के डिवाइडर पर नींद कैसे आ जाती है


मेरा दुनियां का अनुभव सीमित है. मैं केवल घर से दफ्तर, दफ्तर से घर का अनुभव रखता हूं. घर और दफ़्तर के अनुभव बार-बार एकसार से और नीरस होते हैं. दोनो के बीच केवल एक घण्टे की यात्रा जो रोज होती है; उसमें वाहन से बाहर झांकते हुये दुनियां दीखती है. जीवन में कुछ हीContinue reading “सड़क के डिवाइडर पर नींद कैसे आ जाती है”

मोल-भाव गलत है रेलवे स्टेशन पर – काकेश उवाच


काकेश ने परसों पोस्ट लिखी थी कि रेलवे स्टेशन पर आटो-टेक्सी के लिये मोल-भाव गलत है. मुझे एक दृश्य याद हो आया. मैं एक पैसेन्जर गाड़ी से जा रहा था. मेरा कैरिज ट्रेन के अन्त में था. (शायद) राजातलाब (वाराणसी-इलाहाबाद के बीच) स्टेशन पर पैसेन्जर ट्रेन रुकी. प्लेटफार्म के बाहर मेरा कैरिज रुका था. उसीContinue reading “मोल-भाव गलत है रेलवे स्टेशन पर – काकेश उवाच”

हर मुश्किल का हल होता है – बनाम बेलगाम कविता


कई बार बड़ी अच्छी बात बड़े सामान्य से मौके पर देखने को मिल जाती है. एक बार (बहुत सालों पहले) बड़ी फटीचर सी फिल्म देखी थी – कुंवारा बाप. उसमें बड़ा अच्छा गीत था- आंसुओं को थाम ले सब्र से जो काम ले आफतों से न डरे मुश्किलों को हल करे अपने मन की जिसकेContinue reading “हर मुश्किल का हल होता है – बनाम बेलगाम कविता”

रेलवे का सबसे बड़ा सिरदर्द – लेवल क्रॉसिन्ग की दुर्घटनायें


जब मैं गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा था, तब जिस खबर से मुझे अत्यधिक भय लगता था वह था – रेलवे के समपार फाटकों (level crossings) पर होती दुर्घटनायें. अधिकतर ये घटनायें बिना गेटमैन के समपार फाटकों पर होती थीं. उनपर रेलवे का बहुत नियन्त्रण नहीं होता. हम लोग लेवलContinue reading “रेलवे का सबसे बड़ा सिरदर्द – लेवल क्रॉसिन्ग की दुर्घटनायें”