वाणी का पर्स


वाणी मेरी बिटिया है। उसका विवाह दो साल पहले हुआ था। पर वह अभी भी बिल्कुल बच्ची लगती है। उसका ससुराल बोकारो के पास एक कोयले की खदान वाले कस्बे में है। उसके विवाह से पहले हमारा झारखण्ड से परिचय न के बराबर था। पर अब वाणी के झारखण्ड मे रहने के कारण झारखण्ड सेContinue reading “वाणी का पर्स”

पारम्परिक चिकित्सा पर वनस्पति विज्ञानी का कथन


अपनी इस बुधवासरीय अतिथि पोस्ट में वनस्पति विज्ञानी श्री पंकज अवधिया पारम्परिक चिकित्सा पर अपने विचार रख रहे हैं। पारम्परिक चिकित्सा का विषय बहुत कुछ योगिक ज्ञान के विषय सा ही है। कुछ समय से हम आम आदमी में भी योग विषयक हलचल देख रहे हैं। कुछ वैसा की राग पारम्परिक चिकित्सा के विषय मेंContinue reading “पारम्परिक चिकित्सा पर वनस्पति विज्ञानी का कथन”

भारतीय रेलवे की समय सारिणी की कवायद


मैं भारतीय रेलवे की इण्टर रेलवे टाइमटेबल कमेटी की वार्षिक बैठक के सिलसिले में १७-१९ जनवरी को कोलकाता में था। यह वार्षिक बैठक रेलवे के यात्री यातायात के विषय में माघ मेले जैसा होता है। माघ मेले में जैसे संगम पर हिन्दू धर्म की विद्वत परिषद युगों से मिलती और धर्म विषयक निर्णय करती रहीContinue reading “भारतीय रेलवे की समय सारिणी की कवायद”

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