कॉनपोर


हम लोग रेल बजट के संदर्भ में एक पावरप्वॉइण्ट प्रेजेण्टेशन बना रहे थे। अचानक याद आया कि बाम्बे-बड़ौदा एण्ड कॉण्टीनेण्टल इण्डियन रेलवे सन १९०९ में कानपुर में दाखिल हुई। स्टेशन बना था कॉनपोर। यह स्टेशन अब कानपुर में हमारे अभियांत्रिक प्रशिक्षण अकादमी का भवन है। सौ साल!। आप इस भवन के फोटो देखें। कानपुरवाले इसContinue reading “कॉनपोर”

वृक्षारोपण ॥ बाटी प्रकृति है


  पण्डित शिवानन्द दुबे मेरे श्वसुर जी ने पौधे लगाये थे लगभग १५ वर्ष पहले। वे अब वृक्ष बन गये हैं। इस बार जब मैने देखा तो लगा कि वे धरती को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान कर गये थे। असल में एक व्यक्ति के पर्यावरण को योगदान को इससे आंका जाना चाहिये कि उसनेContinue reading “वृक्षारोपण ॥ बाटी प्रकृति है”

मक्खियां और तीसमारखां


अरुण द्वारा दिये लिंक पर जा कर मारी गई मक्खियां अरुण अरोड़ा ने एक मक्खी-मारक प्रोग्राम का लिंक दिया। आप भी ट्राई करें। मैं सामान्यत: अंगूठा चूसा (पढ़ें सॉलिटायर खेलना) करता था। पर यह ट्राई किया तो बहुत देर तक एक भी मक्खी न मरी। फिर फ्लाई स्वेटर का एंगल सेट हो गया तो मरनेContinue reading “मक्खियां और तीसमारखां”

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