नारायण दत्त तिवारी का इस्तीफा


यह नाराण दत्त तिवारी का मामला मेरी समझ के परे है। ताजा समाचार के अनुसार, उन्होंने अपना त्यागपत्र दे दिया है। ८६ की आयु में क्या कोई मर्द ऐसी मर्दानगी का प्रदर्शन कर सकता है? एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन तीन महिलाओं के साथ बिस्तर पर लेटे लेटे रति-क्रीडा करने की क्षमता रख सकताContinue reading “नारायण दत्त तिवारी का इस्तीफा”

सर्दी कम, सब्जी कम


अर्जुन प्रसाद पटेल अपनी मड़ई पर नहीं थे। पिछली उस पोस्ट में मैने लिखा था कि वे सब्जियों की क्यारियां बनाते-रखवाली करते दिन में भी वहीं कछार में होते हैं और रात में भी। उनका न होना मुझे सामान्य न लगा। एक लड़की दसनी बिछा कर धूप में लेटी थी। बोली – बाबू काम परContinue reading “सर्दी कम, सब्जी कम”

हरा बैंगळुरू; भरा बैंगळुरू


विकास के पथ पर पेड़ो का अर्ध्य सबसे पहले चढ़ता है पर बेंगळुरु में हरियाली का आदर सदैव ही किया जाता रहा है। गूगल मैप पर देखिये तो शहर हरा भी दिखायी पड़ेगा और भरा भी। सड़कों के किनारे वृक्ष अपने अन्दर कई दशकों का इतिहास समेटे शान से खड़े हैं। बरगद के पेड़ों कीContinue reading “हरा बैंगळुरू; भरा बैंगळुरू”

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