डेण्टिस्ट से एक अप्वॉइण्टमेण्ट


Ghost-train-to-the-Easter-001मैं पॉल थरू की दूसरी यात्रा पुस्तक – द घोस्ट ट्रेन टू द ईस्टर्न स्टार पढ़ रहा था। पॉल थरू अंकारा में अपने दांत की एक लूज फिलिंग के इलाज के लिये डेण्टिस्ट के पास गये थे। सामान्यत: डेण्टिस्ट के पास जाने की बात किसी ट्रेवलॉग में बहुत बारीकी से नहीं लिखी जायेगी। पर पॉल थरू एक अद्वितीय ट्रेवलॉग लेखक हैं। उन्होने डाक्टर इसिल इव्सिमिक के साथ इलाज के समय का भी अच्छा वर्णन किया है। डाक्टर इव्सिमिक अपना काम करते समय अपने मरीज के साथ अनवरत हल्की आवाज में कमेण्ट्री देते बात भी करती जाती थीं। और एक अच्छे ट्रेवलॉग लेखक के रूप में थरू वह सब बाद में पुस्तक में री-प्रोड्यूज भी करते गये।

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मुझे भी डेण्टिस्ट के पास जाना था। मुझे अपने सामने के दांतों में कहीं कहीं कालापन और क्षरण महसूस हो रहा था पिछले साल भर से। जब तक उसके कारण कोई दर्द नहीं था, मैने वह अनदेखा कर दिया – थोड़ा टूथब्रश ज्यादा चला लेता था, यह मान कर कि उससे कालापन मिट जायेगा और दांत चमक जायेंगे। पर अब लगभग 15-20 दिन से लगने लगा कि ठण्डे-गरम के सम्पर्क में आने पर दांत में दर्द होने लगा है तो मैने समझ लिया कि दांतों के डाक्टर के पास गये बिना चारा नहीं है।

एक मरीज काअपने चेम्बर में दांतों का इलाज करती डाक्टर हाण्डू
एक मरीज का अपने चेम्बर में दांतों का इलाज करती डाक्टर हाण्डू

मुझे बताया गया कि रेलवे अस्पताल, इलाहाबाद में डाक्टर मंजुलता हाण्डू डेण्टिस्ट हैं। और एक अत्यंत कुशल डेण्टिस्ट हैं। मैने जब अपने सहकर्मी श्री राजेश पाण्डेय को उनके पास अप्वाइण्टमेण्ट लेने के लिये भेजा तो बड़ी सहजता से मिल भी गया। न मिलता तो शायद मैं विशेष यत्न न करता और टालता रहता दांत की समस्या। पर अब, वृहस्पतिवार को अपना दफ्तर का सवेरे का काम खत्म कर डाक्टर हाण्डू के पास मैं चला ही गया।

अस्पताल में घुसते ही उनका चेम्बर है। दो केबिन का चेम्बर। एक में एक अन्य डाक्टर मरीरों को बतौर ऑउटपेशेण्ट निपटा रहे थे। एक व्यक्ति ने उठ कर मुझे अपनी कुर्सी दे दी बैठने को। जैसे बस में अपंगों और महिलाओं को सीट दे देने का शिष्टाचार है; रेलवे में अफसर को अपनी सीट खाली कर देने का शिष्टाचार है। मुझे वह लाभ मिला। पर जल्दी ही मुझे दूसरे चेम्बर, जहां डेण्टिस्ट के काम करने के लिये बड़ी रिक्लाइनिंग सीट-कम-बिस्तर लगे थे, में बैठने के लिये जगह मिल गयी। उस चेम्बर में उपकरण नये थे। बिस्तर पर अभी नया पॉलीथीन कवर भी नहीं उतरा था। कुल मिला कर काफ़ी आधुनिक डेण्टल क्लीनिक का एम्बियेन्स दे रहा था वह चेम्बर। डाक्टर हाण्डू एक रिक्लाइनिंग सीट पर लेटे एक मरीज के दांतों की मरम्मत करने में व्यस्त थीं। उनके मुंह पर डाक्टरी मास्क लगा था। वे यदा कदा मरीज को या अपने सहायक को निर्देश में कुछ कह रही थीं। मुझे कुछ मायूसी हुई कि पॉल थरू के पुस्तक की डाक्टर इसिल इव्सिमिक की तरह रनिंग कमेण्ट्री नहीं दे रही थीं। 😦

जल्दी ही मेरा नम्बर आ गया। मुझे उस चेम्बर में उपलब्ध दूसरी सीट पर रिक्लाइन करने को कहा गया। डाक्टर हाण्डू ने मेरे दांतों का मुआयना किया और मेरी समस्या पूछी।

कुछ महीनों से आगे के नीचे और ऊपर के दांतों में ठण्डा या गरम के कॉण्टेक्ट में आने पर तेज अहसास होता है। अदरवाइज़ दर्द नहीं होता।

डाक्टर ने दांतो को ठक ठक ठोंकते हुये पूछा – दर्द होता है?

नहीं, केवल ठण्डा-गर्म से तकलीफ है।  

दांतों में कीड़ा लग गया है।

दांत के कीड़े की परिकल्पना
दांत के कीड़े की परिकल्पना

मुझे मन ही मन यह लगा कि कोई कीड़ा है जो दांतों में घुसा खाये जा रहा है दांतों को। मैने मेण्टल नोट किया कि बाद में इस कीड़े को इण्टरनेट पर तलाश करूंगा। बाद में तलाश करने पर पता चला कि ऐसा कोई कीड़ा नहीं है। चीनी या अन्य खाद्य पदार्थों से पैदा होने वाले अम्ल में पनपने वाले बेक्टीरिया दांतों का कैविटी या केरीज (cavity, caries) के रूप में क्षरण करते हैं। उसे ही सामान्य भाषा में कीड़ा लगना कहा जाता है। दांत या चमड़ी के डाक्टरों को मैने जन सामान्य को समझाने के लिये मैडिकल जार्गन रहित भाषा का प्रयोग करते पाया है – जैसे डाक्टर हाण्डू ने कीड़ा का प्रयोग किया या जैसे बहुत पहले एक चर्म रोग विशेषज्ञ मुझे डर्मेटाइटिस के सुधार के बारे में कहते थे कि “चार आना भर” सुधार हो गया है।


दांतों में समस्या भारतीय लोगों में पान-तम्बाकू खाने के कारण अधिक होती है। लोगों में मीठा खाने की प्रवृत्ति कम है। पर मेरे साथ पान खाने का कोण नहीं है। अलबत्ता मीठा बाभन नहीं खायेगा तो कौन खायेगा! 🙂
मुझे बताया गया कि दवाओं के लम्बे समय तक सेवन से भी हड्डियों (जिनमें दांत भी शामिल हैं) में क्षरण होता है। वह भी एक कारण हो सकता है मेरे साथ।


दांतों में दर्द न होने के कारण डाक्टर ने सफाई कर दांत की फिलिंग का निर्णय किया। उन्होने मुझे बाद में बताया कि अगर फिर भी ठण्डा-गर्म की सेन्सिटीविटी (आम भाषा में “पानी लगना”) होती है तो वे आर.सी.टी. (root canal treatment) करेंगी। दांतों की सफ़ाई और फिलिंग की प्रक्रिया में मुझे कई बार थूकना पड़ा। पानी या दवाओं की फुहार, खुरचने की क्रिया, फिलिंग की तकनीक – सभी मेरे मुंह पर अजमायी जा रही थीं और मेरे मन में यह था कि अगर इस सब की एक फिल्म बनती जो मैं बाद में देख पाता तो वह मुझे काफ़ी इनसाइट देती डेण्टिस्ट्री के बारे में। अन्यथा मैं तो लेटा लेटा यदा कदा दीवार पर टंगी उस सफ़ेद स्वस्थ दांत वाली सुन्दर लड़की का फोटो ही देख पा रहा था, या फिर डाक्टर के उस असिस्टेण्ट को; जिसके सिर के पृष्ठ भाग में उसको सवर्ण घोषित करती उसकी छोटी चोटी थी, जो छोटे खिचड़ी रंगत के बालों का अधेड़ था, जो काम दक्षता से कर रहा था पर शक्ल सूरत से देहाती लग रहा था – मेरी तरह!

अपने इण्ट्रोवर्ट नेचर के विपरीत मैं वहां अधिकधिक सम्प्रेषण की अपेक्षा कर रहा था – जो मिला नहीं। यह मेरी डाक्टर के साथ पहली सिटिंग थी। इसमें मेरे नीचे के दांत की फिलिंग हुई। शनीवार को दूसरी सिटिंग है, जिसमें ऊपर के दांत की फिलिंग होनी है। शायद उस दिन मैं डाक्टर हाण्डू से कुछ प्रश्न कर पाऊं।

दूसरी सिटिंग

शनिवार को नियत समय पर पंहुच गया। इन्तजार करते समय मेरे बगल में मैले कुचैले कपड़े पहने, चारखाने का स्कार्फ़ जैसा गमछा सिर पर बांधे एक वृद्ध बैठा था। हाथ में एक पतली सी बांस की लकड़ी थी जो ठीक से न संभालने के कारण यदाकदा गिर जाती थी। हाथ में अपने कागज लिये, लम्बी प्रतीक्षा के लिये तैयार बैठा था वह।

दीवार पर दांतों को दिखाते हुये विज्ञापनी महिला का चित्र था – किसी Glizer कम्पनी का। देखने वाले को निहारती हंसती महिला अपने स्वस्थ दांत दिखा रही थी। पर देखने वाला मेरे जैसा इनफ़ीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स वाला हो तो उसे लग सकता है कि अपने अच्छे दांतों से वह चिढ़ा रही है। वहां बैठे मैं बहुत जल्दी उकताने लगा।

डाक्टर हाण्डू एक महिला के दांतों की डेण्टिस्ट्री में व्यस्त थीं। ॒अपने महीन स्वर में यदा कदा अपने सहायक या उस महिला को निर्देशात्मक कुछ कहती थीं। आज सहायक कोई दूसरा व्यक्ति था – परसों वाले से ज्यादा स्मार्ट।

मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा और सिटिंग में भी ज्यादा समय नहीं लगा। मैने बताया कि पिछली सिटिंग के बाद नीचे के दांतों में मुझे पानी लगने की समस्या नहीं हुयी। एक आध बार लगा कि हल्का सेनसेशन है, पर वह शायद ऊपर वाले दांतों का सेनसेशन नीचे वाले दांतों का होने का समझने की मेरी गलती भी हो सकती है। डाक्टर को शायद मेरा यह तर्क सही न लगा। पर उन्होने बिना समय गंवाये मेरे ऊपर के दो दांतों की सफ़ाई-घिसाई और फिलिंग का काम लगभग बीस मिनट में पूरा कर लिया।

डाक्टर मंजुलता हाण्डू
डाक्टर मंजुलता हाण्डू

डाक्टर हाण्डू ने काम पूरा कर अपना मास्क उतारा तो पहली बार मैने उनका चेहरा देखा। उनकी अनुमति मांगी कि उनका एक फोटो अपने ब्लॉग के लिये ले लूं? और जैसा एक घुटा हुआ ब्लॉगर करता है – इससे पहले कि सामने वाला व्यक्ति अपनी सहमति या विरोध दर्ज करे, मैं उनका चित्र ले चुका था। उन्हे मैने बताया कि इस सिटिंग्स के बारे में मैं एक पोस्ट लिखूंगा और उन्होने कहा कि भविष्य में कभी भी आवश्यकता हो तो मैं उनके डेण्टल क्लीनिक पर आ सकता हूं।

मेरे मन में पहले यह धारणा थी कि डेण्टल डाक्टर के पास जाने का मतलब ही होता है लगभग 80% सम्भावना कि दांत उखाडा जायेगा और कुछ दिन तक भीषण दर्द रहेगा या फिर चेतावनी मिल जायेगी कि आपके सही तरीके से दांतों की देखभाल न करने से उनकी की आयु लगभग समाप्त है… पर वैसा नहीं हुआ। डाक्टर की दांतों की दक्ष फ़िलिंग के बाद अब काफी समय तक मुझे परेशान नहीं होना होगा। उनके कहे अनुसार सॉफ्ट ब्रश और हल्के से मंजन की शुरुआत मुझे करनी है।

बाकी, दांतों की फिलिंग लगभग कितना चलेगी, यह डाक्टर हाण्डू से पूछना भूल गया…