मछली पकड़ना और फोटोग्राफ़ी


कोलाहलपुर में केवट नहीं हैं। उनके पास नावें नहीं हैं। धन्धा भी मछली पकड़ने का नहीं है उनका। अधिकांश मजदूरी करते हैं, खेतिहर हैं या बुनकर। सवेरे गंगा किनारे वे शौच, दातुन और स्नान के लिये आते हैं। नहाने के बाद कुछ धर्मपारायण हनुमान जी या शिवजी के मन्दिर जाते हैं तो पास ही मेंContinue reading “मछली पकड़ना और फोटोग्राफ़ी”

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