मधुमक्खी का गड़रिया – शम्भू कुमार


जैसे गड़रिये, गाड्डुलिये लोहार, बतख का रेवड़ ले कर चलने वाले हैं। वैसे ही ये मधुमक्खी का रेवड़ ले कर घूमते फिरते हैं। हजारों हैं इस रोजगार में।

श्रीराम बिंद की मटर


हमने उन्हें चाय पिलाई। साथ में दो बिस्कुट। वह व्यक्ति जो हमारे लिये सवेरे सवेरे मटर ले कर आ रहा है, उसको चाय पिलाना तो बनता ही है।

ठेले पर मेरठ की नानखटाई


इस ठेले का किट मैने अपने कस्बे महराजगंज में देखा और बनारस में भी।

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