आनंदा डेयरी के चंदन ठाकुर

गोपालजी डेयरी (कालांतर में गोपालजी-आनंदा) ने उत्तर भारत/उत्तर प्रदेश में बहुत विस्तार किया। चंदन ठाकुर का कहना है कि इस डेयरी के मुखिया राधेश्याम दीक्षित बहुत डायनमिक व्यक्ति हैं। कम्पनी के दुग्ध उत्पादों की बड़ी रेंज है। आनंदा के व्यवसायिक क्षेत्र विस्तार की भी बहुत योजनायें हैं।


महराजगंज में आनंदा डेयरी का एक रीटेल आउटलेट खुला है। दीपवली के दिन उद्धाटन हुअ था। सुरेंद्र कुमार यादव जी चलाते हैं। वहां से गाहे बगाहे दूध, दही, मठ्ठा और छेना की मिठाई आदि लेता हूं। उनके पास फुल क्रीम मिल्क होता है। छ्प्पन रुपये लीटर।

कल अमूल डेयरी के कलेक्शन सेण्टर में 29 रुपये के कलेक्शन रेट देख कर मैंने अपने नियमित दूध के वैकल्पिक स्रोत तलाशने की सोची। आनंदा के रीटेल आउटलेट पर सवेरे साईकिल सैर के दौरान पूछा – आपके पास क्रीमलेस दूध है? मुझे नियमित एक लीटर रोज की आवश्यकता है।

“नहीं। रोज नहीं होता। खत्म हो जाता है जब आता भी है। आप तो एक लीटर लेंगे। अगर आप जैसे चार छ ग्राहक और हों तो रेगुलर मंगाने का काम किया जा सकता है।” – दुकान पर उपस्थित सज्जन ने जवाब दिया। उन्होने टोण्ड मिल्क में रुचि नहीं दिखाई, पहले भी। शायद उसमें उनका मार्जिन कम होता हो। अब उनके लिये और ग्राहक मैं कहां से जुगाड़ता?!

वहीं एक सज्जन खड़े थे। उन्होने मुझसे सवाल किया – “आपको क्रीमलेस मिल्क क्यों चाहिये? फुल क्रीम वाला क्यों नहीं?”

आनंदा डेयरी के चंदन ठाकुर

“अब जो हमारी उम्र है, उसमें शरीर को फैट की जरूरत नहीं है। बाकी तत्व – कैल्शियम, प्रोटीन आदि चाहियें, फैट नहीं।” – मैंने उत्तर दिया। “अगर वसा की जरूरत हो तो अलग से घी खरीद कर वह पूरी की जायेगी।”

उन सज्जन ने कहा – “आप सही कहते हैं। डेयरी को यह जरूरत पूरी करनी चाहिये। आपको रोज क्रीमलेस मिल्क मिलेगा। एक लीटर के पैक में नहीं मिल पायेगा। ढाई सौ मिलीलीटर के चार पैकेट आ कर ले जाईयेगा। उसकी कीमत के हिसाब से 42 रुपये बनता है; आप चालीस रुपये लीटर के भाव से ले जायें। कल से।”

पता चला कि वे सज्जन चंदन ठाकुर हैं। उत्तर प्रदेश के इस इलाके के आधा दर्जन जिलों में आनंदा डेयरी के उत्पादों का वितरण देखते हैं। उन्होने बताया कि आनंदा दिल्ली की कम्पनी है। यहां दूध और अन्य उत्पाद कानपुर के प्लाण्ट से आते हैं।

आनंदा डेयरी की वेबसाइट पर मैंने देखा कि तीस प्रकार के उत्पाद हैं डेयरी के।

मुझे जिन उत्पादों में रुचि लगी, वे हैं – दूध (11 प्रकार के दूध), रायता की बूंदी, पनीर खिचड़ी, मक्खन, छाछ (11 प्रकार की छाछ है!), जीरा कुकीज, आटा कुकीज, दही, स्किम्ड मिल्क पाउडर, फ्रोजन मटर और मटर पनीर, घी, खोआ आदि। अभी हाल ही में आनंदा का गुझिया खरीदा था, जो स्वाद में थावे की पेडकुआ की तरह था। और वह होली के दौरान आने वाले मेहमानों को बहुत पसंद आया।

आनंदा डेयरी के यादव जी के आउटलेट पर खड़े चंदन ठाकुर

अगर आनंदा डेयरी अपने आउटलेट के लिये रूरल मार्केट भी तलाश रही है, तो ये सभी उत्पाद, लोगों की रुचि जान कर नियमित उपलब्ध कराने की कवायद करनी चाहिये। चंदन ठाकुर जी शायद उस दिशा में ध्यान दे रहे थे, तभी उन्होने मेरी स्किम्ड/टोण्ड/डबल टोण्ड मिल्क की जरूरत को पूरा करने की सोची।

आनंदा डेयरी होमपेज

विकीपेडिया पेज के अनुसार 1989 में गोपालजी डेयरी के नाम से बनी आनंदा डेयरी (नाम 2012 में बदला) का वार्षिक टर्नओवर 1800 करोड़ का है। यह कम्पनी पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक प्लाण्ट लगाने की योजना रखती है। चंदन ठाकुर जी ने बताया कि मधुपुर (राबर्ट्सगंज के समीप; यहां से 85किमी दूर) प्लाण्ट के लिये सोचा जा रहा है। वहां या और आसपास कुछ महीनों या साल भर में प्लाण्ट आ जायेगा।

गोपालजी डेयरी (कालांतर में गोपालजी-आनंदा) ने उत्तर भारत/उत्तर प्रदेश में बहुत विस्तार किया। चंदन ठाकुर का कहना है कि इस डेयरी के मुखिया राधेश्याम दीक्षित बहुत डायनमिक व्यक्ति हैं। कम्पनी के दुग्ध उत्पादों की बड़ी रेंज है। आनंदा के व्यवसायिक क्षेत्र विस्तार की भी बहुत योजनायें हैं। इसका दही सामान्य तकनीक से नहीं, डेनमार्क की तकनीक से बनता है और बहुत पौष्टिक है।

मैंने आनंदा की वेबसाइट पर 11 प्रकार के दही के प्रकार देखे। चॉकलेट दही से ले कर मीठी और प्रोबायोटिक दही तक। पता नहीं, सुरेंद्र यादव के आउटलेट पर ये सब उपलब्ध होंगे या नहीं। पर फिर भी सुरेंद्र की दुकान पर बहुत वेराईटी दिखती तो है।

चंदन जी का मैंने मोबाइल नम्बर लिया। उन्हे अपने घर आमंत्रित भी किया। आगे देखा जायेगा कि वे कीमलेस/स्किम्ड/टोण्ड दूध नियमित उपलब्ध करा पाते हैं या नहीं। एजेंसी या रीटेल आउटलेट का ग्राहक के प्रति आगे बढ़ कर सेवा के लिये तत्पर होना उतना गहन नहीं है। पूर्वांचल व्यवसायिकता की सोच में फिसड्डी है – ऐसा मेरा मानना है। उस सोच में चंदन ठाकुर कुछ बदलाव ला सकेंगे, आगे देखने की बात है!