इतना खर्च कर रहे हैं उम्मीदवार #गांवपरधानी में!


यह सब पैसा, जो इकठ्ठा हो रहा है, तुरंत पोस्टर लगाने, गाड़ी-मोटरसाइकिल का पेट्रोल भराने, चाय समोसा, जलेबी खिलाने, गांजा – दारू – भांग का प्रबंध करने या सीधे सीधे वोट खरीदने में जा रहा है। पगलाये हुये हैं उम्मीदवार!

डिजिटल उपकरण और सॉफ्टवेयर रंग और लिंग भेद करते हैं?!


पूर्व-पश्चिम का भेद एक बात। भारत में तो सॉफ्टवेयर/आर्टीफीशियल इण्टेलिजेंस; सवर्ण-वंचित, पुरुष-महिला, गरीब-अमीर, शहरी-ग्रामीण आदि में भेदभाव के घटकों से भारत के समाज को आगे और बांटने वाला बन सकता है (अगर समाज इस विभेद को भांप पाये, तो)।

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