श्यामलाल; और वे भी खूब पदयात्रा करते हैं


गेरुआ वस्त्र पहने थे। कुरता धोती (तहमद की तरह), सिर पर सफेद गमछा लपेटा था। पीछे लपेट कर कम्बल जैसा कुछ लिया था। बांये हाथ में एक झोला। कोई लाठी नहींं थी हाथ में। चाल तेज थी। नंगे पांव, छरहरे और फुर्तीले थे वे।