कुण्डम से जबलपुर – वृहन्नलाओं का आशीष पाये प्रेमसागर


वृहन्नलाओं में सबसे उम्रदराज प्रेमसागर के सिर पर हाथ रख आशीष दे रहा था। भारत में कोई बड़ा काम हो, बच्चा जन्मे या किसी का विवाह हो और हिंजड़े गुणगान कर आशीष दें; वह शुभ माना जाता है।

देवरी से कुण्डम का रास्ता


प्रेम सागर पहले अपने संकल्प में, ज्योतिर्लिंगों तक येन केन प्रकरेण पंहुचने में अपनी कांवर यात्रा की सार्थकता मान रहे थे। अब वे यात्रा में हर जगह, हर नदी, पहाड़, झरने, पशु पक्षियों और लोगों में शिव के दर्शन करने लगे हैं।

बहुत सानदार फोटो घींचे हयअ यार!


बच्चे में, उससे पांच गुना ज्यादा उम्र वाले अजनबी के साथ बात करते, प्रश्न करते कोई संकोच, कोई झिझक नहीं थी।
“बहुत सानदार फोटो घींचे हयअ यार! … अरे ये तो हुंआ की फोटो है। और ये तो सिवाला की है। … केतने क मोबाइल हौ?”

देवरी में साहू जी के घर पर


साहू जी के भांजे अनिल ने बताया – “यह तो नसीब है कि सेवा का मौका मिलता है। प्रेम सागर जी तो धरम पर टिके हैं। हम लोगों को अच्छी अच्छी बातें बता रहे हैं। ज्ञान की बातें बता रहे हैं। उनका यहां रुकना सौभाग्य है हमारा।”

भेड़िअहों की दुनियाँ


लोग गाय पालते हैं और उससे स्नेह से बातचीत करते हैं। कुछ लोग तोता पालते हैं और मिट्ठूराम से भी बतियाते हैं। भेड़ से स्नेह जताना और बात करना मैंने पहली बार देखा। … कब तक नया देखने और नोटिस करने की ललक अपने में भरे रखोगे?

अमेरा रोपनी कर्मी छोड़ने आये पांच किलोमीटर


यादव जी मेरे साथ घाटी को पार किए हैं 3 किलोमीटर तक। भगवान इनके बाल बच्चों को सुखी रखे निरोग रखें। यही महादेव जी से निवेदन कर रहा हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद इनको। हर हर महादेव! – प्रेमसागर