गंगा से कोसी – 1


दो दिन प्रेमसागर ने आतिथ्य लेने में बिताये और मैंने “मैला आंचल” के पन्ने पलटे। उन्होने आगे की लम्बी यात्रा के पहले बमुश्किल मिला विश्राम किया और मैंने किया पूर्णिया के अंचल की जिंदगी जानने का प्रयास।

गांव में छ दशकों में अखबार


चौबे जी, शायद पास के गांव चौबेपुर के निवासी थे। बनारस से माधोसिंह के बीच अखबार पंहुचाया करते थे। सफेद धोती-कुरता-जाकिट और टोपी पहने कांग्रेसी थे वे। अस्सी के आसपास उनकी मृत्यु हुई।

विनोद दुबे – माई की कृपा, बच गया


माई पर विश्वास की यह आस्था तर्क के परे की चीज है। दर्शन तो उन दोनो ने भी किये होंगे। और वे परोपकार भी कर रहे थे इन्हें साथ बिठा कर लाने में। पर वे चले गये ऊपर। … वैसे ऊपर जाना बेहतर था या इस भवजगत में खटना?

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