प्रांग्शी की ऑनलाइन पाठशाला


ऑनलाइन शिक्षा, पालन-पोषण और बच्चे के भविष्य पर एक व्यक्तिगत नोट कल शैलेश और उसकी पत्नी अतु मिलने आए थे। साथ में उनकी पाँच साल की बिटिया—प्रांग्शी। जब वह कार से उतरी, तो उसके हाथ में खिलौना नहीं था, न कोई गुड़िया। एक टैबलेट था। उस पर उसकी क्लास चल रही थी। देश के अलग-अलगContinue reading “प्रांग्शी की ऑनलाइन पाठशाला”

चारवाक का युग आ गया है!


“जीवन का क्या भरोसा। जितना सामने है, उसका आनंद लो। कुछ नहीं है तो ऋण लेकर घी पियो।” चारवाक ने यह बात बहुत पहले कह दी थी। तब शायद किसी ने गंभीरता से नहीं ली। आज लग रहा है — आदमी नहीं बदला, बस साधन बदल गये हैं। घी अब भी है, ऋण भी है;Continue reading “चारवाक का युग आ गया है!”

महराजगंज कस्बे का बदलाव – दांत की डाक्टरी


कस्बे के बाजार के बदलाव की कथा अगर कही जाए, तो वह पिछले एक दशक में कहीं ज़्यादा स्पष्ट दिखती है। जब मैं रिटायर होकर यहाँ आया था, तब इक्का‑दुक्का ही प्रशिक्षित फ़िज़ीशियन थे; बाकी झोलाछाप। छोटी‑सी समस्या के लिए भी बनारस जाना पड़ता था, और ख़राब हाईवे व बढ़े ट्रैफ़िक के कारण दो घंटेContinue reading “महराजगंज कस्बे का बदलाव – दांत की डाक्टरी”

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