महराजगंज बाजार में पानी की पाइप लाइन


बाबा प्रधान की तबियत कुछ नासाज़ थी। सवेरे देर से उठे थे, पर फिर भी मेरे साथ आ बैठे। बातचीत यूँ ही शुरू हुई और देखते-देखते महराजगंज बाजार के बढ़ने की कहानी आगे खुलने लगी—कैसे धीरे-धीरे बुनियादी सुविधाएँ आईं, और पानी जैसी साधारण लगने वाली चीज़ कभी पूरे बाजार की सामूहिक चिंता हुआ करती थी।Continue reading “महराजगंज बाजार में पानी की पाइप लाइन”

सुधा जी की शादी और पालकी का जमाना


सुधा शुक्ल हमारे घर मिलने आईं। पंड़ाने (पांडेय लोगों के घरों का समूह) के दीपू की बुआ हैं वे। मेरी पत्नीजी की हमउम्र, जन्म 1959–60 के आसपास। करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर आई थीं। वे और मेरी पत्नीजी बचपन की सखियाँ हैं। उस समय सखियाँ अग्नि को साक्षी मानकर बनती थीं—जैसे राम और सुग्रीव। सुधाContinue reading “सुधा जी की शादी और पालकी का जमाना”

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