
हमारे घर में संहजन नहीं है। एक लगाया था पर उसकी पत्तियां और फलियाँ कड़वी होती थीं। सो उसे हटा दिया। उसकी जगह कोई और फलदार पौधा लगा है।
सुभाष जी को मालुम था कि हमारे यहां संहजन नहीं है। तो उन्होने ढेर सारी फलियाँ भेज दीं। काफी तो हमने दाल में उबाल कर चूस कर खाईं। बची हुई फलियों के दो-तीन इंच के टुकड़े काट कर कड़ी धूप में सुखाये जा रहे हैं। पूरी तरह सूख जायेंगे तो उनको मिक्सी में पीस कर पाउडर बनेगा।
वह पाउडर व्यंजनों में या दही आदि में मिलाया जायेगा। मैंने पढ़ा है कि संहजन घुटनो के दर्द के लिये फायदेमंद होता है। अमेजन पर यह सुपर – फूड कहा गया है और ₹2000 प्रति किलो बिकता है।
घर में यह सुखाने-पीसने से एक पाव संहजन.मोरिंगा पाउडर तो बन ही जायेगा। फ्री में सुपर – फूड उत्पादन कर लेंगे हम गांवदेहात और घरपरिसर में। प्रयोग सफल रहा तो अगले साल सुभाष दुबे जी से और फलियां मांगी जायेंगी!
