“आवाज अड्डा” कार्यक्रम के बाद यह अहसास हुआ कि बीमार पड़ने पर अस्पताल में जगह मिलना नेक्स्ट-टू-इम्पॉसिबिल है। सो किसी बाहरी सहायता की ओर देखने की बजाय अपनी खोल में दुबकना ज्यादा उचित स्टेटेजी प्रतीत हो रही है।
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
आज जो देखा #गांवदेहात #गांवपरधानी
“मेरे पास परधानी की तीन चार झकाझक, सनसनीखेज खबरें हैं। पर सुनाऊंगा तभी जब बढ़िया हलुवा बनेगा। और एक खबर, जो बहुत ही खास है, वह तो तभी सुनाऊंगा, जब हलुये में काजू किशमिश भी पड़ेगा।”
परेशानी में हैं कड़े प्रसाद
जुगाड़ू हैं कड़े प्रसाद। जिला पंचायत तक टटोल ले रहे हैं भाई के इलाज के लिये। आम आदमी तो यूंही फड़फड़ाता रहता। खैर, अभी कोई मदद नहीं मिली है।
