गंगा किनारा और बालू लदान के मजदूर


काम मेहनत का है। सो 3-4सौ (गांव का रेट) न कम है न ज्यादा। जो गांव में रहना चाहते हैं, वे इसको पसंद करेंगे; वर्ना अवसर देख कर महानगर का रुख करेंगे। मजदूर गांव/महानगर के बीच फ्लिप-फ्लॉप करते रहते हैं।

प्रेमसागर अनूपपुर की ओर


कल उन्होने बारिश के लिये बेहतर तैयारी कर ली है। रेनकोट तो नहीं मिला, एक छाता खरीद लिया है। यह भी बताया कि छाता केवल अचानक आयी बारिश से बचने और कोई शरण ढूंढने के काम ही आयेगा। बारिश में चलते चले जाने के लिये नहीं!

सवेरे की चाय पर टुन्नू (शैलेंद्र) पण्डित


टुन्नू पण्डित – शैलेंद्र दुबे – मेरे साले साहब हैं। उन्हीं के चक्कर में पड़ कर हम गांव में अपना घरबार शिफ्टिया लिये रिटायरमेण्ट के बाद। कभी कभी सवेरे की चाय पर आ जाते हैं। वह बहुत कम होता है – ज्यादातर उनके चेला लोग सवेरे से उन्हें घेर लेते हैं। आजकल जिल्ला भाजपा केContinue reading “सवेरे की चाय पर टुन्नू (शैलेंद्र) पण्डित”

Design a site like this with WordPress.com
Get started