सरपत की बाड़


सर्दी एकबारगी कम हो कर पल्टा मार गयी। शुक्र-सनीचर को सब ओर बारिश हुई। कहीं कहीं ओले भी पड़े। ट्विटर पर रघुनाथ जी ट्वीट कर रहे थे कि दिल्ली में ओले भी पड़े। बनारस से अद्दू नाना ने फोन पर बताया कि देसी मटर पर पाला पड़ गया है। ओले पड़े थे, उसके बाद फसलContinue reading “सरपत की बाड़”

उठो; चलो भाई!


अनूप शुक्ला जब भी बतियाते हैं (आजकल कम ही बतियाते हैं, सुना है बड़े अफसर जो हो गये हैं) तो कहते हैं नरमदामाई के साइकल-वेगड़ बनना चाहते हैं। अमृतलाल वेगड़ जी ने नर्मदा की पैदल परिक्रमा कर तीन अनूठी पुस्तकें – सौन्दर्य की नदी नर्मदा, अमृतस्य नर्मदा और तीरे तीरे नर्मदा लिखी हैं। साइकल-वेगड़ जीContinue reading “उठो; चलो भाई!”

टेंगर


[टेंगर, और यह कि सोंइस (मीठे जल की डॉल्फिन) रोज दिखती है यहां।] एक नाव पर वे दो थे – बाद में पता चला नाम था लल्लन और राकेश। लल्लन के हाथ में पतवार थी और राकेश जाल डाल रहा था गंगा नदी में। हम – मैं और मेरी पत्नीजी – गंगा किनारे खड़े देखContinue reading “टेंगर”

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