मन्नत-ए-हीरालाल


डेढ़ साल पहले हीरालाल पर रिपोर्ट थी – हीरालाल की नारियल साधना। उसमें है कि हीरालाल ने केश बढ़ा रखे थे और दाढ़ी भी रखी थी किसी मन्नत के चलते। उस समय हीरालाल ने बताया था कि वह मनौती पूरी होने वाली थी। देश के इस इलाके में मन्नत मानने का चलन है। दक्खिन मेंContinue reading “मन्नत-ए-हीरालाल”

प्री-मानसूनस्य प्रथमे प्राते:


प्री-मानसून के प्रथम प्रात: में कालिदास को याद करता हूं। मोहन राकेश को भी याद करता हूं। क्यों? ब्लॉग़ पर कारण बताने की बाध्यता नहीं है। वैसे भी यह साहित्यिक ब्लॉग नहीं है। कल शाम आंधी आई और ओले पड़े। जिसके गांव में बंटाई पर खेती दे रखी गई है, वह तुरंत फोन लगा करContinue reading “प्री-मानसूनस्य प्रथमे प्राते:”

श्वान मित्र संजय


कछार में सवेरे की सैर के दौरान वह बहुधा दिख जाता है। चलता है तो आस पास छ-आठ कुत्ते चलते हैं। ठहर जाये तो आस पास मंडराते रहते हैं। कोई कुत्ता दूर भी चला जाये तो पुन: उसके पास ही आ जाता है। कुत्ते कोई विलायती नहीं हैं – गली में रहने वाले सब आकारContinue reading “श्वान मित्र संजय”

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