डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?


तरुण जी ने पिछली पोस्ट (डिसऑनेस्टतम समय) पर टिप्पणी मेँ कहा था: Edmund Burke का एक अंग्रेजी quote दूंगा: “The only thing necessary for the triumph of evil is for good people to do nothing.” समाज की इस दशा के लिए कोई और नहीं हम खुद ही जिम्मेदार है खासकर पिछली पीढ़िया। इसे ठीक भीContinue reading “डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?”

नत्तू पांड़े स्काइप पर


नत्तू पांड़े अब हफ्ते में दो दिन स्काइप के माध्यम से मिलते हैं। उनके पापा (विवेक पाण्डेय) रात में लौटते हैं कामकाज से निपट कर। तब वे पन्द्रह-बीस मिनट के लिये नत्तू को ऑनलाइन कराते हैं। शुरू में वीडियो – बातचीत नत्तू पांड़े को अटपटी लगती थी; पर अब माहिर हो चले हैं नत्तू इसContinue reading “नत्तू पांड़े स्काइप पर”

शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड


मैने कभी नहीं सोचा कि मैं इतिहास पर लिखूंगा। स्कूल के समय के बाद इतिहास बतौर एक डिसिप्लिन कभी देखा-पढ़ा नहीं। पर यहां इलाहाबाद के जिस शिवकुटी क्षेत्र में रहता हूं – गंगा के तट पर कोई चार-पांच सौ एकड़ का इलाका; वहां मुझे लगता है कि बहुत इतिहास बिखरा पड़ा है। बहुत कुछ कोContinue reading “शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड”

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