कहां कहां दखल देगा एआई?


अमर उजाला में न्यूयॉर्क टाइम्स से कबाड़ा एक लेख है – “एआई का फायदा उठायें, खामियां किसमें नहीं होतीं”। इसमें ईवान रैंटलिफ जी नाम के सज्जन कहते हैं कि टेलीमार्केटिंग में और सामान्य बातचीत में भी; एआई घुस गया है। उनका कहना है कि जो भी उनसे बात करना चाहता है उसके सामने वे इसContinue reading “कहां कहां दखल देगा एआई?”

नीलगाय


<<< नीलगाय >>> गंगा किनारे का इलाका नीलगाय के कारण बंजर होता जा रहा है। यह एक ऐसा कथ्य है, जो ऑफ्ट-रिपीटेड है और इसमें कोई मौलिकता बची नहीं। कोई ऐसी सक्सेस स्टोरी भी नहीं सुनने में आई कि, एक पाइलट प्रॉजेक्ट के रूप में ही सही, नीलगाय आतंक का कोई तोड़ निकल पाया हो।Continue reading “नीलगाय”

गूलर


>>> गूलर <<< गूलर एक अजीबोगरीब वृक्ष है। रामचरित मानस के लंका कांड में अंगद-रावण संवाद में, रावण पर तंज कसते गूलर का संदर्भ दे कर अंगद बोलते हैं – गूलर फल समान तव लंका, मध्य बसहु तुम जीव असंका। अर्थात लंका गूलर के फल जैसी है जिसमें तुम और अन्य राक्षस अज्ञानी कीट कीContinue reading “गूलर”

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