सिद्धार्थ और हम गये थे गंगा तट पर। साथ में उनका बेटा। वहां पंहुचते रात घिर आई थी। आज वर्षा का दिन था, पर शाम को केवल बादल क्षितिज पर थे। बिजली जरूर चमक रही थी। बिल्ला, जोला और कल्लू मछेरा समेटे जाल के साथ गंगा माई बढ़ी नहीं हैं पहले से। अंधेरे में मछेरेContinue reading “बिल्ला, जोला और कल्लू”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
एक वृद्ध का ब्लॉग?
सुन्दरलाल बहुगुणा कहते हैं कि उनकी जिन्दगी के दौरान ही गंगा में पानी आधा हो गया। अखबार में उनकी फोटो में सन जैसे सफेद दाढ़ी मूछों वाला आदमी है। मैं बहुगुणा को चीन्हता हूं। पर वे अब बहुत बूढ़े लगते हैं चित्र में। वे चिपको अन्दोलन के चक्कर में अखबार में आते थे। और मैंContinue reading “एक वृद्ध का ब्लॉग?”
घरसो मां जर्नीर्गमय:
तमसो मां ज्योतिर्गमय: तम से ज्योति की ओर। घरसो मां जर्नीर्गमय:। घर से जर्नी (यात्रा) की ओर। मैं जर्नियोगामी हो गया हूं। बड़ी हड़हड़ाती है रेल गाड़ी। वातानुकूलित डिब्बे में न तो शोर होता है, न गर्दा। पर इस डिब्बे में जो है सो है। इतने में एयरटेल समोसा मैसेज देता है – Airtel welcomesContinue reading “घरसो मां जर्नीर्गमय:”
