मालगाड़ी या राजधानी एक्स्प्रेस?!


क्या राजधानी की तरह चली हमारी मालगाड़ी! राजधानी एक्स्प्रेस दिल्ली से मुगलसराय तक नौ घण्टा समय लेती है। कालका मेल सवेरे सात बज कर सैतीस मिनट पर गाजियाबाद से चल कर शाम आठ बज कर दस मिनट पर मुगलसराय पंहुचती है। श्री विदित तिवारी, मुख्य गाड़ी नियंत्रक, इलाहाबाद रेल मण्डल अपने नियंत्रण कक्ष में। इन्हीContinue reading “मालगाड़ी या राजधानी एक्स्प्रेस?!”

गांव खत्म, शहर शुरू – बेंगळुरु/जैमालुरु


हेब्बल फ्लाईओवर, बेंगळुरू पहली बार महानगरीय जीवन जी रहा हूँ । वह उस समय जब मैं श्री ज्ञानदत्त जी को ११ सूत्रीय सुझाव दे चुका हूँ, गाँवों की ओर प्रयाण हेतु। सुझाव बेंगलुरु में स्थानान्तरण के पहले दिया था और उस समय तक महानगरीय रहन सहन के बारे में चिन्तन मात्र किया था, अनुभव नहीं।Continue reading “गांव खत्म, शहर शुरू – बेंगळुरु/जैमालुरु”

गांव की ओर


द्वारकापुर गांव में गंगा किनारे पीपल का पेड़ मैं गांव गया। इलाहाबाद-वाराणसी के बीच कटका रेलवे स्टेशन के पास गांव में। मैने बच्चों को अरहर के तने से विकेट बना क्रिकेट खेलते देखा। आपस में उलझे बालों वाली आठ दस साल की लड़कियों को सड़क के किनारे बर्तन मांजते देखा। उनके बालों में जुयें जरूरContinue reading “गांव की ओर”

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