शिक्षा व्यवस्था


कुछ वर्ष पहले नालन्दा के खण्डहर देखे थे, मन में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता के भाव जगे। तक्षशिला आक्रमणकारियों के घात न सह पाया और मात्र स्मृतियों में है। गुरुकुल केवल “कांगड़ी चाय” के विज्ञापन से जीवित है। आईआईटी, आईआईएम और ऐम्स जैसे संस्थान आज भी हमें उत्कृष्टता व शीर्षत्व का अभिमान व आभास देतेContinue reading “शिक्षा व्यवस्था”

रेत, वैतरणी नाला और बन्दर पांड़े


कभी कभी गठी हुई पोस्ट नहीं निकलती सवेरे की गंगा किनारे की सैर में। या फिर सन के रेशे होते हैं पर आपका मन नहीं होता उसमें से रस्सी बुनने का। पर सन के रेशों की क्वालिटी बहुत बढ़िया होती है और आप यूं ही फैंक नही सकते उन रेशों को। सो बनती है गड्डमड्डContinue reading “रेत, वैतरणी नाला और बन्दर पांड़े”

स्त्रियों के गंगा स्नान का महीना – कार्तिक


कार्तिक में सवेरे चार-पांच बजे से स्त्रियां घाट पर स्नान प्रारम्भ कर देती हैं। इस बार इस ओर गंगाजी की कटान है और वेग भी तेज है। नहाने में दिक्कत अवश्य आती है। पर वह दिक्कत उन्हें रोकती हो – यह नहीं लगता। मैं तो सवेरे पौने छ बजे गंगा तट पर जाता हूं। बहुतContinue reading “स्त्रियों के गंगा स्नान का महीना – कार्तिक”

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