गूगल सर्च – मीडिया ही सयाना नहीं है खबर जानने में!


आज का दिन गूगल सर्च की पोस्टों के नाम ही! बस, आपके झेलने के लिये यह आज की दूसरी और अंतिम पोस्ट है. और फिर गूगल सर्च की पोस्ट बन्द.खबर सूंघने-जानने को मीडिया ही शेर नहीं है. ट्रैफिक पैटर्न – चाहे वह रेल का हो या टेलीफोन का, मीडिया से पहले खबर का ट्रिगर देताContinue reading “गूगल सर्च – मीडिया ही सयाना नहीं है खबर जानने में!”

गूगल सर्च – "This site may harm your computer?"


यह रचना सिंह जी द्वारा चलाये जा रहे हिन्दी-अंग्रेजी सामंजस्य धर्म-युद्ध के पक्ष में अंग्रेजी में शरारतन लिखा हेडिंग नहीं है. अंग्रेजी के बारेमें इतनी मारपीट चल रही है कि मैने कल फुरसतिया सुकुल की सलाह पर अरविन्द कुमार का सहज समांतर कोश भी खरीद लिया है. यह अलग बात है कि समांतर कोश मेंContinue reading “गूगल सर्च – "This site may harm your computer?"”

बाप का घर समझ रख्खा है क्या?


मेरे मित्र के पिताजी अकेले आज़मगढ़ में रहते थे. मित्र के साथ रहने को तैयार नहीं थे. वृद्धावस्था की समस्यायें थीं और बढ़ती जा रही थीं. मां के देहावसान के बाद का एकाकीपन झेलते; पर बिना बोले अपना जीवन के प्रति नकारात्मक रुख पुख्ता करते; पिताजी को कैसे अपने पास लाने को राजी करें –Continue reading “बाप का घर समझ रख्खा है क्या?”

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