रीपोस्ट : कछार की पहली तेज बारिश के बाद


पूरे दस साल बाद यह रीपोस्ट। इसके दो चित्र मैंने बिंग फोटो जेनरेटर AI से बनाये हैं।
नोश्टॉल्जिया और भविष्य की तकनीक का एक घालमेल।
और बदलती जलवायु का अभास भी। आज प्रचण्ड गर्मी है और तब तेज बारिश हुई थी!

आज का आत्मबोध


वह तो भला हो कि ब्लॉग और सोशल मीडिया पर; आप कितना भी साधारण लिखें, लोग प्रशंसा कर देते हैं। थोड़ी बहुत ईगो मसाज हो जाता है। अन्यथा, गांवदेहात में, ससुराल में घर बना कर रहना वैसा ही है मानो बत्तीस दांतों के बीच फंसी निरीह जीभ होना।

मटकी पुर के अंजनी दुबे और चैटजीपीटी


ग्रामीण जीवन को – अगर लोग मेहनती हैं – एआई बेहतर ही बनायेगा। उनके काम को अपग्रेड करेगा और शहराती लोगों से कहीं बेहतर तरीके से वे जी सकेंगे। अंजनी कुमार का भविष्य बेहतर ही होगा।

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