शायद यह सुवर्णरेखा नदी के उद्गम का कोई प्रपात होगा। मैने प्रेमसागर की ओडीशा यात्रा के दौरान सुवर्णरेखा के समुद्र के समीप विशाल जलराशि देखी है। यहां उद्गम की पतली धारा देख रहा हूं। घर बैठे यह अनुभव लेना रोमांचक है।
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
आखिर सुंदरलाल आ ही गये!
“हां, भीड़ त रही। लहाई क बैठि ग रहे।” सुंदर साठ से ज्यादा उम्र का है। लम्बी दूरी की ट्रेन में, बिना आरक्षण की बोगी जिसमें लोग ठुंसे रहते हैं, उसमें भीड़ उसके लिये कोई बहुत असुविधा की बात नहीं है।
विवेक और वाणी की माता पिता की सुध
जैसे शिखर पर बहुत एकाकीपन होता है उसी तरह सेवाभाव भी एकाकीपन वाला होता है। अगर आपको उसमें सेल्फ मोटीवेशन न हो तो बहुत जल्दी लोगों की छोटी बड़ी जरूरतों को पूरा करना और उपेक्षा भी झेलना ऊबाऊ बन जाता है।
