यात्रायें, यादें और कोविड19 – रीता पाण्डेय


भरतपुर में मालगाड़ी को सिगनल मिल गया था। वह हिलने लगी तब स्टेशन मास्टर साहब दौडते हुये आये और अपने घर से बनी चाय और पेपर कप हमें थमा दिये। हिलते ब्रेकवान में खड़े खड़े हमने गार्ड साहब से शेयर करते चाय पी। … मेरे और मेरे बच्चों के लिये यह यादगार अनुभव था।

कोविड19 और रोजमर्रा की जिंदगी – रीता पाण्डेय की अतिथि पोस्ट


आखिर, खाने कमाने के लिये कोई व्यक्ति अपने घर से दूर नहीं जाना चाहता। अपने परिवार के साथ रहना चाहता है। भले ही पगार थोड़ी कम मिले।

कोविड19 और आत्मनिर्भरता – रीता पाण्डेय की अतिथि पोस्ट


धन्यवाद प्रधानमंत्री जी को दिया जाये या कोविड19 के भय को; हर व्यक्ति घर में कुछ न कुछ काम करना सीख गया है। मेरे घर में सब काम में लगे हैं।

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