मेरी चाय की दुकान की सोच


अदरक, कालीमिर्च, चायमसाला और चायपत्ती प्रति कप कितनी मिलानी है और दूध का प्रयोग किस प्रकार करना है कि दूध फटे नहीं — यह सब इतना कर लिया है कि एक थीसिस लिख सकता हूं। और बात केवल चाय बना सकने की नहीं है। चाय प्रेम भी प्रकृति प्रेम से कम नहीं है।

आखिर सुंदरलाल आ ही गये!


“हां, भीड़ त रही। लहाई क बैठि ग रहे।” सुंदर साठ से ज्यादा उम्र का है। लम्बी दूरी की ट्रेन में, बिना आरक्षण की बोगी जिसमें लोग ठुंसे रहते हैं, उसमें भीड़ उसके लिये कोई बहुत असुविधा की बात नहीं है।

चिड़ियों के लिये फीकी नमकीन


मुझे यकीन है कि हमारे घर की दो-तीन दर्जन छोटी बड़ी चिड़ियों और गिलहरियों की किडनी फीकी नमकीन से स्वस्थ्य रहा करेगी। वैसे, सलीम अली वाली नजर से देखें तो फीकी नमकीन की बजाय सामान्य नमकीन इनको ज्यादा पसंद है।

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