सूखती खेती


महीना भी नहीं हुआ। मैने 29 फरवरी को पोस्ट लिखी थी – सब्जियां निकलने लगी हैं कछार में। इस पोस्ट में था – शिवकुटी के घाट की सीढ़ियों से गंगाजी तक जाने के रास्ते में ही है उन महिलाओं का खेत। कभी एक और कभी दो महिलाओं को रेत में खोदे कुंये से दो गगरीContinue reading “सूखती खेती”

फांसी इमली


फांसी इमली एक इमली के वृहदाकार पेंड़ का ठूंठ है। यह सुलेम सराय इलाहाबाद में मेरे दफ्तर के रास्ते में बांई ओर पड़ता है। वाहन ज्यादातर वहां रुकते नहीं। बहुत कम लोगों ने इसे ठीक से नोटिस किया होगा। कहते हैं कि इस पेड़ से सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की असफलता के बाद अंग्रेजोंContinue reading “फांसी इमली”

कछार रिपोर्ताज – 3


बहुत कम होता है, या हूं कहूं कि शिवकुटी के इस हिस्से में पहली बार देखा – कोई अपने प्रिय (शायद पालतू जानवर) को दफना गया था रेत में। एक गेरुआ कपड़ा और गेन्दा की माला थे कब्र के ऊपर। एक काला कुत्ता कब्र खोदने का प्रयास कर रहा था। भगाने पर भी वहीं आContinue reading “कछार रिपोर्ताज – 3”

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