आज का आत्मबोध


वह तो भला हो कि ब्लॉग और सोशल मीडिया पर; आप कितना भी साधारण लिखें, लोग प्रशंसा कर देते हैं। थोड़ी बहुत ईगो मसाज हो जाता है। अन्यथा, गांवदेहात में, ससुराल में घर बना कर रहना वैसा ही है मानो बत्तीस दांतों के बीच फंसी निरीह जीभ होना।

मटकी पुर के अंजनी दुबे और चैटजीपीटी


ग्रामीण जीवन को – अगर लोग मेहनती हैं – एआई बेहतर ही बनायेगा। उनके काम को अपग्रेड करेगा और शहराती लोगों से कहीं बेहतर तरीके से वे जी सकेंगे। अंजनी कुमार का भविष्य बेहतर ही होगा।

रामनगर, सब्जी मण्डी और सुरेश पटेल


क्या लागत है सब्जी की, क्या भाव हैं – थोक और खुदरा। कौन कमा रहा है – किसान या आढ़तिया? किसका रिस्क ज्यादा है? कौन सब्जी उगाता है, कौन सब्जी ले जाता है, कौन सब्जी से खेलता है?! बहुत से प्रश्न हैं।

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