ऋचा भट्ट बडोला की पाइन इन द टेल


मैंने सोचा था कि ऋचा एक नितांत शहरी जीव होंगी और उनकी गांवदेहात की समझ, हद से हद, सतही ही होगी। पर एक एक कहानी खत्म करने पर यह अहसास पुख्ता होता गया कि ऋचा में जो अंचल की समझ है वह ठोस और गहरी है। उनकी कहानी बुनने की क्षमता, सरल साधारण में भी कथा के सभी अनिवार्य तत्व सूंघ कर सशक्त भाषा में उकेरना प्रशंसनीय है।

मुकेश पाठक का शहद का कॉम्बो पैक


मुकेश जी मधुमक्खी पालन में दो प्रकार से समस्याओं से जूझ रहे हैं। मधुमक्खी पालन अपने आप में चुनौती है। यह एक घुमंतू व्यवसाय है जिसमें स्थान परिवर्तन के कारण रखरखाव, लॉजिस्टिक्स और प्रबंधन की विकट समस्यायें हैं। इसके अलावा ब्राण्डेड शहद में मक्का-चावल शर्करा घोल का मिलाना दूसरी बड़ी समस्या है, जो मधुमक्खी पालन की प्रतिद्वंद्विता में सेंध लगाती है।

पहाड़ के पंत


अमित सिंह के चेम्बर में आशुतोष पंत मिले। आशुतोष मेरे पड़ोसी हैं। मेरे घर – सप्तगिरि के सामने ही है उनका दुमंजिला आवास। पर पहले कभी आशुतोष से मुलाकात नहीं हुई थी। मैं पंत उपनाम को पहाड़ से जोड़ कर देखता था, इसलिये आशुतोष को भी पहाड़ का समझा। वे निकले भी। पर एक नयीContinue reading “पहाड़ के पंत”

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