चैट जीपीटी के साथ गांव के चित्रों पर बातचीत


चैटी – जब आप मुझसे पूछते हैं कि मेरी “अनुभूति की सीमाएं” क्या हैं, तो यह कह सकता हूं कि मेरी सीमाएं वहीं खत्म हो जाती हैं जहां मानव मन अपनी भावनात्मक और व्यक्तिगत यात्रा शुरू करता है।

सवेरे की चाय


हरे भरे परिसर में प्रकृति के बीच आधा-आधा लीटर चाय सेवन! गर फिरदौस बर रुये जमीन अस्त्। अगर पृथ्वी पर स्वर्ग कहीं है तो वह इंटरमिटेंट फास्टिंग के बाद सवेरे के चाय के इस अनुष्ठान में ही है। यहीं है, यहीं है और यहीं ही है!

उमरहाँ के राकेश मिसिर जी


राकेश जी को छोड़ने के लिये मैं घर के गेट तक गया। उनके जाते हुये मन में विचार आया कि घर में किसी के आने पर उन्हें चाय परोसी जाये तो (लौंग-इलायची भले हो न हो) साथ में तश्तरी में एक चुनौटी और सुरती होनी ही चाहिये।

Design a site like this with WordPress.com
Get started