कथरी


बौद्ध विहार में दान के उपयोग के बारे में बहुत पहले पढ़ा था – दान में मिले कम्बल पहले ओढ़ने, फिर बिछाने, फिर वातायन पर परदे … अंतत: फर्श पर पोछा लगाने के लिये काम आते थे। कोई भी कपड़ा अपनी अंतिम उपयोगिता तक उपयोग किया जाता था। मुझे लगा कि कितने मितव्ययी थे बौद्धContinue reading “कथरी”

नया साल और लदर फदर यात्री


निरंतरता में नये साल के क्या मायने हैं। शायद वही जो यात्रा में मील के पत्थर के होते हैं। हम शुरुआत भी शून्य से नहीं करते हैं और यह भी ज्ञात नहीं होता कि गंतव्य, वह जो भी कुछ हो, उसका मील का पत्थर कौन सा होगा। पर हर मील के पत्थर पर सुकून होताContinue reading “नया साल और लदर फदर यात्री”

आठ बिगहा पर आगे चर्चा


यह एक रेवलेशन था कि जवाहिरलाल के पास आठ बिगहा खेत है; बहादुरपुर, मछलीशहर में। किन परिस्थितियों में वह गांव से निकला और यहां दिहाड़ी पर लेबर का काम करता है; वह समझने के लिये उससे और भी अन्तरंगता चाहिये। जो मेरे साथ अभी नहीं है। पर जवाहिर के आठ बिगहा जमीन के बारे मेंContinue reading “आठ बिगहा पर आगे चर्चा”

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