जेल, जेल न रही!


सन 1867 में स्थापित बैंगळुरु की सैंण्ट्रल जेल अब फ्रीडम पार्क में तब्दील हो गयी है। प्रवीण पाण्डेय के सवेरे के भ्रमण का स्थान। इसने ट्रिगर की है यह पोस्ट – जेल से स्वतंत्रता तक की यात्रा की हलचल बयान करती। यह पोस्ट श्री प्रवीण पाण्डेय की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। प्रवीण बेंगळुरू रेल मण्डलContinue reading “जेल, जेल न रही!”

मालगाड़ी या राजधानी एक्स्प्रेस?!


क्या राजधानी की तरह चली हमारी मालगाड़ी! राजधानी एक्स्प्रेस दिल्ली से मुगलसराय तक नौ घण्टा समय लेती है। कालका मेल सवेरे सात बज कर सैतीस मिनट पर गाजियाबाद से चल कर शाम आठ बज कर दस मिनट पर मुगलसराय पंहुचती है। श्री विदित तिवारी, मुख्य गाड़ी नियंत्रक, इलाहाबाद रेल मण्डल अपने नियंत्रण कक्ष में। इन्हीContinue reading “मालगाड़ी या राजधानी एक्स्प्रेस?!”

गांव खत्म, शहर शुरू – बेंगळुरु/जैमालुरु


हेब्बल फ्लाईओवर, बेंगळुरू पहली बार महानगरीय जीवन जी रहा हूँ । वह उस समय जब मैं श्री ज्ञानदत्त जी को ११ सूत्रीय सुझाव दे चुका हूँ, गाँवों की ओर प्रयाण हेतु। सुझाव बेंगलुरु में स्थानान्तरण के पहले दिया था और उस समय तक महानगरीय रहन सहन के बारे में चिन्तन मात्र किया था, अनुभव नहीं।Continue reading “गांव खत्म, शहर शुरू – बेंगळुरु/जैमालुरु”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free