अनूप सुकुल से एक काल्पविक बातचीत


मैने पाया कि धीरे धीरे मेरे पास ब्लॉग जगत के लोगों के कुछ सज्जनों के फोन नम्बर संग्रहित हो गये हैं। कुछ से यदा-कदा बातचीत हो जाती है। जिनसे नहीं मिले हैं, उनके व्यक्तित्व का अनुमान उनकी आवाज से लगाने का यत्न करते हैं। उस दिन एक सज्जन का फोन था, जिनकी मैं चाह करContinue reading “अनूप सुकुल से एक काल्पविक बातचीत”

होमवर्क की आउटसोर्सिंग!


बच्चों का होमवर्क मम्मियां करती हैं – प्राइमरी कक्षाओं तक। पर यह तो गजब है – आस्ट्रेलिया के कम्प्यूटर साइंस के विद्यार्थी अपना होमवर्क भारत के प्रोग्रामर्स को आउटसोर्स कर दे रहे हैं! और १०० आस्ट्रेलियायी डालर्स में उनका काम पक्का कर उन्हे मिल जा रहा है। बाकायदा रेण्ट-अ-कोडर पर निविदा निकलती है। कोडर अपनीContinue reading “होमवर्क की आउटसोर्सिंग!”

एसईजेड कहां से आया बन्धुओं?


बहुत ठेलाई चल रही है तहलका छाप पत्र-पत्रिकाओं की। एक ठो नन्दी भी बड़े हैण्डी बन गये हैं। ऐसा लग रहा है कि “दास-कैपीटल” के बाद सबसे अथॉरिटेटिव कुछ है तो तहलका है!हमें लग रहा है कि हम भी कहीं से कुछ पढ़ कर ठेल दें, ताकि सनद रहे कि दखिनहे ही सही, पढ़वैया तोContinue reading “एसईजेड कहां से आया बन्धुओं?”

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