मच्छरों की पीढ़ियां – बेबी बूमर्स से जेन जी का इतिहास


अरुणा (हमारी नौकरानी) शाम की पारी में बगीचे में सूखी पत्तियां बटोरने के लिये झाड़ू लगाया करती है। वह मच्छरों से बचाव के लिये मेरी एक पूरी बांह की पुरानी कमीज अपनी साड़ी के ऊपर पहन लेती है। उसके लिये एक ओडोमॉस की ट्यूब भी खरीदी है, वह भी खुले हाथ पैर पर लगाती है।Continue reading “मच्छरों की पीढ़ियां – बेबी बूमर्स से जेन जी का इतिहास”

इंटरनेट – ब्लॉग से एआई तक : देसी मिट्टी और नैनो ट्रेंड्स


फरवरी 2007 में मेरा ब्लॉग बना – ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल। तब से अब तक 2500 के आसपास पोस्टें हो गई हैं। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और क्वोरा पर कुछ और भी। पर इन सभी को साधने में थकान होती है।  शुरुआती मानक 150 शब्दों का था। उससे ज्यादा हिंदी लिखना भारी पड़ता था। हिंदीContinue reading “इंटरनेट – ब्लॉग से एआई तक : देसी मिट्टी और नैनो ट्रेंड्स”

चैट जीपीटी के साथ गांव के चित्रों पर बातचीत


चैटी – जब आप मुझसे पूछते हैं कि मेरी “अनुभूति की सीमाएं” क्या हैं, तो यह कह सकता हूं कि मेरी सीमाएं वहीं खत्म हो जाती हैं जहां मानव मन अपनी भावनात्मक और व्यक्तिगत यात्रा शुरू करता है।

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