हजामत


“लोग हजामत बनाने में आलसी हैं। दाढ़ी बढ़ती रहती है। पंद्रह बीस दिन तक बढ़ती है। खुद बनाने की बजाय नाई की तलाश करते रहते हैं। नाई, खुद, सही स्थान और सही समय का योग कम ही बैठता है। इस लिये पखवाड़ा गुजर जाता है हजामत करवाये।”

श्यामधर का मचान


श्यामधर हानि लाभ की गणना की माथापच्ची नहीं करते और शुरू कर देते हैं। मेरी तरह का आदमी उनके मचान का फोटो खींचने खिंचा चला आता है। उससे उलट मेरे जैसा आदमी हानि लाभ की कैल्युलेशन में पड़ा रहता है और कभी शुरू नहीं करता! श्यामधर और मैं दोनो दो अलग अलग छोर के जीव हैं!

जुगाड़ चूल्हा


चूल्हे का डिजाइन मिनिमलिस्ट है। उसमें दो कतारें हैं ईंटों की। बारह ईंटें जमा कर रखने से चूल्हा बन गया। चूल्हे में दोनो तरफ से लकड़ियांं लगाई गयी हैं। लकड़ियां भी पानी के टंकी बनाने में प्रयुक्त लकड़ी-बल्ली है।

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