नीलकंठ के कयास


[ नीलकंठ एक मानसिक चरित्र है। वह गंगा किनारे बरियापुर में रहता है। गंगा वहां मनोरम दृष्य बनाती हैं— यू टर्न इस तरह लेती हैं कि वहां घाट से सूर्योदय और सूर्यास्त, दोनो गंगा के जल में होते दिखते हैं। रेलगाड़ियों के प्रबंधन से थका नीलकंठ वहां एक रिटायर्ड होम में अगली पारी जी रहाContinue reading “नीलकंठ के कयास”

बूढ़ा आदमी और दांत का डाक्टर


दांत के डाक्टर साहब और उनकी जूनियर ने मेरे बाँई ओर के दाँतों का अंतिम रेडियोग्राफ शूट कर परिणाम देखा और संतोष की साँस ली। आज की मेरी सिटिंग पूरी हुई। स्वमित्र, डाक्टर साहब ने पूछा—बाहर जो दद्दा बैठे हैं, उनका क्या मामला है। पहले आ चुके हैं? खुशबू, जूनियर डाक्टर, ने बताया—नहीं, पहले तोContinue reading “बूढ़ा आदमी और दांत का डाक्टर”

कुंठित लोगों की असहिष्णुता


एआई उनकी बैसाखी बन गया है, तो वे अपने को और भी फूला हुआ पाते हैं। अजीब किस्म के कॉन्स्टीपेटेड लोग हैं। मानसिक बवासीर के शिकार।मुझे याद आता है—साल भर पहले मैंने सर्दियों में साइकिल चलाने के बारे में लिखा था। पोस्ट में बस इतना था कि ठंड के बावजूद मैंने एक घंटा साइकिल चलाई।Continue reading “कुंठित लोगों की असहिष्णुता”

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