दूध लेते जाते मैं रोज वह पत्तियों का ढेर और भरसायँ देखता था। भरसायँ यानी मिट्टी का वह गोलाकार चूल्हा जिसमें दाना — चना, मक्का — भूना जाता है। गाँव में अभी भी दिख जाती है सड़क किनारे। मुझे रोज यह भी नजर आता है कि पत्तियों का जखीरा बढ़ रहा है। पर दाना भूननेContinue reading “धनरा भुंजईन की भरसायँ “
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नर्मदा यात्रा का प्रारम्भ
नर्मदा दंड परिक्रमा — प्रेमसागर गुजरे बलिया पेसेंजर से सवेरे फोन आया तो प्रेमसागर की ट्रेन बनारस सिटी में खड़ी थी। उन्होंने बताया कि वे प्रयाग जा रहे हैं, वहां से चित्रकूट जायेंगे। किसी चंदन की लकड़ी का आठ इंच का टुकड़ा ले कर लेकर आगे निकलेंगे—नर्मदा की दंड परिक्रमा के लिये। मेरे हिसाब सेContinue reading “नर्मदा यात्रा का प्रारम्भ”
नेपाल के बारे में बतियाते जवान
गांवदेहात डायरी उमरहाँ के विकास पांडे के यहां से शहद की दो बोतलें लेकर लौट रहा था। गांव के फाटक पर रुकना पड़ा—रेलवे फाटक बंद था। इतने में एक मोटर साइकिल बगल में आकर रुकी। तीन सवार थे—नौजवान। कोई बात कर रहे थे नेपाल की। एक ने मुझसे पूछा—साइकिल बैटरी वाली है? बात का दरवाजाContinue reading “नेपाल के बारे में बतियाते जवान “
